गोरखपुर        महराजगंज        देवरिया        कुशीनगर        बस्ती        सिद्धार्थनगर        संतकबीरनगर       
उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने किया कालानमक चावल पर शोध कार्यों का निरीक्षण

भनवापुर/सिद्धार्थनगर। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना, सिद्धार्थनगर में आज भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान (मुंबई) के वैज्ञानिकों ने कालानमक चावल पर चल रहे शोध कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस अवसर पर भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान मुंबई से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या के फसल अनुसंधान केंद्र मसौधा के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ दीक्षित, तथा कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत, श्री प्रवेश कुमार एवं डॉ. मार्कण्डेय सिंह उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कालानमक चावल की सुगंध, उत्पादकता और गुणवत्ता पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि कालानमक चावल उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर धान है, जिसे ष्बुद्ध का आशीर्वादष् भी कहा जाता है। इसकी पहचान को संरक्षित रखते हुए किसानों तक अधिक उत्पादक एवं रोग प्रतिरोधी प्रजातियाँ पहुँचाना समय की आवश्यकता है। भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित कालानमक के प्रभेदों एवं आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, कुमारगंज द्वारा विकसित कालानमक प्रभेदों का परीक्षण वर्तमान में कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में चल रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में इन परीक्षणों से कालानमक की उच्च उत्पादक एवं सुगंधित प्रजातियाँ किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा सकेंगी, जिससे उन्हें अधिक लाभ होगा और यह चावल वैश्विक स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना सकेगा। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों ने बताया कि संस्थान निरंतर किसानों के हित में काम कर रहा है और कालानमक की प्राचीनता व गुणवत्ता को बनाए रखते हुए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से इसे और बेहतर बनाने का प्रयास जारी है। इस निरीक्षण कार्यक्रम ने किसानों और वैज्ञानिकों के बीच शोध सहयोग को नई दिशा दी है और उम्मीद जताई गई है कि कालानमक चावल की खेती भविष्य में और भी लाभकारी एवं व्यापक बनेगी।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!