गरीब ब्राह्मण परिवारों के साथ हुई समाज की बैठक

बलरामपुर/पचपेड़वा। आज के दौर में सामान्य वर्ग से ब्राह्मण का होना एक अभिशाप है ? यही अभिशाप ब्राह्मण समाज आज भी झेल रहा है,कहने का ब्राह्मण समाज सबसे ऊंची जाति लेकिन सरकारी सहायता में उपेक्षा का शिकार सिर्फ ब्राह्मण समाज होता है, आज भी ब्राह्मण अपनी बुद्धि ,कर्मठता,ज्ञान,शक्ति और विवेक से समाज में जीवन तो यापन कर लेता है लेकिन गरीब ब्राह्मण आर्थिक तंगी के कारण रिक्शा,मजदूरी,ठेला लगाने का काम करते देखे गए है, ऐसे परिवारों के बीच ब्राह्मण समाज की समरसता मिलन की बैठक आजमडीह गांव में मोहन शर्मा और सरजीवन पांडेय के नेतृत्व में हुआ,बैठक में ब्राह्मण समाज के उत्थान और विकास पर सर्वेश पांडेय,राजीव मिश्रा,राजेश त्रिपाठी,गिरजेश पांडेय और अरुण देव पाठक ने अपना अपना वक्तव्य दिया,पचपेड़वा विकास खंड के सभी ब्राह्मण बंधु को एक जुट करने के लिए न्याय पंचायत वार दिए गए जिम्मेदारियों की समीक्षा भी हुई, उपस्थित ब्राह्मण समाज को बैठक में जनेऊ,तिलक लगाकर और शिखा रखने के लिए भी कहा गया। गायत्री मंत्र और हनुमान चालीसा पाठ के बाद बैठक संपन्न हुआ।इस अवसर पर विधा पति त्रिपाठी,अमित तिवारी,विनय पाठक,शारदा मिश्र,अखिलेश्वर पांडेय उर्फ धाने महराज,सतीश चंद्र मिश्र,राम सागर पाठक,रक्षा राम शर्मा,सहित कई विप्र बंधु मौजूद रहे। इन कुप्रथाओं को गांधी जी ने मिटाने की कोशिश की थी तभी से आरक्षण का सूत्रपात हुआ। आरक्षण काफी अच्छा साबित हुआ। दलित और पिछड़े वर्गों को भी बराबरी का मौका मिलने लगा।डा.भीमराव अम्बेडकर ने भी छुआछूत पर काफी काम किया।लेकिन अब ऐसा कुछ भी नहीं है अब सभी बराबर है अब मैं ये देख रही हूं कि अधिकांश पिछड़ा वर्गये लोग काफी सम्पन्न होते हुए भी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। और अधिकांश सामान्य वर्ग के लोग बहुत गरीब होने पर भी लाभ से बन्चित हैं। कुछ समय पहले मोदी जी ने सामान्य वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की है।कम से कम मोदी जी ने इस दिशा पर काम तो किया।मेरे हिसाब से तो अब आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करना चाहिए और इसके लिए दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को ही आगे आना चाहिए।या फिर मोदी जी ने गैस सिलेंडर की सब्सिडी छोड़ने की लोगों को सलाह दी और उनके कहने पर लाखों लोगों ने अपनी सब्सिडी छोड दी जिससे छः करोड़ घरों में मुफ्त गैस कनेक्शन पहुंच गए हैं।इसी तरह हमारे के आर्थिक रूप से मजबूत भाई बहने खुद आरक्षण के लाभ को छोड़ दें और ये घोषणा करें कि ये लाभ गरीब सामान्य वर्ग को मिले इसके तहत अधिकांश सामान्य वर्ग के लोगों को भी राहत मिल सकती है।




