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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

यूरिया के लिए परेशान न हों किसान: कृषि वैज्ञानिक

भनवापुर/सिद्धार्थनगर। खरीफ़ सीज़न की धान, मक्का, तिल और सब्जियों की फसलें इस समय खेतों में लहलहा रही हैं। इनमें धान प्रमुख खाद्यान्न फसल है, जो इस समय कल्ले फूटने से पुष्पावस्था तक पहुँच रही है। इस अवस्था में फसल को पोषक तत्व और सिंचाई की अत्यधिक आवश्यकता होती है, लेकिन बारिश न होने और यूरिया खाद की कमी के कारण किसान चिंतित हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र सोहना सिद्धार्थनगर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार देहाती ने किसानों को आश्वस्त करते हुए बताया कि यूरिया न मिलने पर भी किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। यूरिया में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है, जो पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी है। परंतु अधिकांश किसान इसका असंतुलित प्रयोग करते हैं। अगर किसान यूरिया का संतुलित उपयोग करेंगे तो कम मात्रा में भी फसल को पर्याप्त नाइट्रोजन उपलब्ध हो सकता है। उन्होंने बताया कि यूरिया घोल का छिड़काव करने से खाद की बचत होती है और उत्पादन पर भी असर नहीं पड़ता। इसके लिए किसान 5 किलो यूरिया को 250 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ खेत में छिड़काव कर सकते हैं। वहीं, गोबर की सड़ी खाद के गोलों में यूरिया भरकर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। धान में लीफ कलर चार्ट की मदद से नाइट्रोजन की सही मात्रा का आकलन करना भी लाभकारी है। यूरिया की कमी की स्थिति में किसान अन्य नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का भी प्रयोग कर सकते हैं। इनमें अमोनियम सल्फेट (20ः नाइट्रोजन व 23ः सल्फर), कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (25ः नाइट्रोजन), अमोनियम क्लोराइड (25ः नाइट्रोजन), कैल्शियम नाइट्रेट (15ः नाइट्रोजन) और अमोनियम नाइट्रेट (33ः नाइट्रोजन) प्रमुख हैं। इनका प्रयोग कृषि विशेषज्ञों के परामर्श से करने पर फसल को कोई नुकसान नहीं होगा।डॉ. देहाती ने किसानों से अपील की कि वे यूरिया की कमी को लेकर घबराएं नहीं, बल्कि संतुलित और वैज्ञानिक पद्धति से नाइट्रोजन प्रबंधन करें ताकि फसल की पैदावार सुरक्षित रहे।

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