कुछ को मिली राहत, कुछ लौटे मायूस

भनवापुर/सिद्धार्थनगर। धान की रोपाई हो चुकी पहले तो बारिश ना होने से किसान परेशान था, परन्तु अब युरिया खाद नहीं मिलने से किसानों का संकट बरकरार है,ऐसे में किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। गुरुवार को क्षेत्र के मन्नीजोत स्थित राजेन्द्र प्रसाद खाद भंडार की दुकान पर तहसील प्रशासन की कड़ी निगरानी में यूरिया खाद का वितरण किया गया। सुबह से ही खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे कि यूरिया खाद का वितरण सही तरीके से कराया जाए जिससे कोई भी धांधली ना हो । किसानों से आधार कार्ड और खतौनी अनिवार्य रूप से मांगे गए। वितरण व्यवस्था का संचालन रोहित सिंह,सौरभ सिंह और राजेश प्रताप मणि के नेतृत्व में किया गया, जबकि तहसील कर्मचारी विष्णु प्रताप सिंह व पुलिस ने लोगों को बताया कि खाद सभी को मिलेगा और कोई धांधली ना करें । उन्होंने किसानों को समझाते हुए कहा कि “स्टॉक सीमित है, इसलिए एक परिवार को एक ही बोरा दिया जा रहा है। सभी किसानों तक खाद पहुंचे, यह हमारी प्राथमिकता है।” किसानों में संतोष और मायूसी दोनों खाद पाकर कुछ किसानों के चेहरे पर संतोष की झलक दिखी। उन्हें उम्मीद जगी कि कम से कम बोआई की शुरुआत प्रभावित नहीं होगी। लेकिन सीमित स्टॉक के चलते कई किसान निराश होकर खाली हाथ लौटने को मजबूर हुए। भीड़ में शामिल कई किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिली तो धान की फसल पर सीधा असर पड़ेगा। स्थानीय किसान गंगा धनोहरी और अब्दुल रहीम, जाहिद, प्रांजल, गुलज़ार, भरतलाल हजरत अली ने बताया कि “धान की रोपाई का समय है, हर किसान को कम से कम दो से तीन बोरे खाद की जरूरत है। प्रशासन एक बोरे से कैसे काम चलवाएगा?” वहीं, कुछ किसानों ने कहा कि अगर खाद की आपूर्ति लगातार और पर्याप्त मात्रा में होती रही, तभी समस्या का समाधान हो पाएगा। इतने स्टॉक का हुआ वितरण कृषि विभाग के अधिकारी रमाशंकर पटेल व भनवापुर ब्लॉक के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे। वितरण के तहत 305 बोरी बृजनंदन महनुआ,305 बोरी राजेन्द्र प्रसाद खाद भंडार मन्नीजोत,304 बोरी यदुनंदन सरोथर को उपलब्ध कराई गई। इसके बावजूद किसानों की संख्या अधिक होने के कारण कई लोग वंचित रह गए। किसानों की मांग किसानों ने सामूहिक रूप से प्रशासन से मांग की है कि समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद उपलब्ध कराया जाए, ताकि बोआई और फसल उत्पादन पर प्रतिकूल असर न पड़े। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खाद की आपूर्ति में लापरवाही बरती गई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।




