पोखरियाडीह गांव में बारिश ने तोड़ी आखिरी उम्मीद

डुमरियागंज/सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पोखरियाडीह गांव में मक्कू और उनका परिवार पिछले तीन वर्षों से खुले आसमान के नीचे, एक प्लास्टिक की पन्नी के सहारे जीवन बिता रहे हैं। ठेला चलाकर रोजी-रोटी कमाने वाले मक्कू के पास अपने पिता से मिली जमीन है। लेकिन गरीबी के कारण वे उस पर पक्की छत नहीं बना पाये हैं। मक्कू ने सरकारी आवास योजना के तहत तीन बर्ष पहले आवेदन किया था। इसके बावजूद आज तक उन्हें कोई सहायता नहीं मिली है। इस दौरान उन्होंने भीषण गर्मी, कड़ाके की ठण्ड और मूसलाधार बारिश के मौसम खुले में बितायें। लेकिन उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार को हुई भारी बारिश ने उनकी बची-खुची उम्मीद भी तोड़ दी। पन्नी के सहारे बने कच्चे आशियाने की मिट्टी की दीवारें पानी में बह गईं। अब मक्कू, उनकी पत्नी और तीन छोटे बच्चे सिर्फ ठेले पर ही सिमटकर रहने को मजबूर हैं। चारों तरफ पानी और कीचड़ से घिरे इस परिवार के पास न सूखी जगह है, न ही जरूरी सामान रखने का ठिकाना। वहीं मक्कू बताते हैं कि सरकारी दफ्तर के कई चक्कर लगायें, कागज जमा कियें, लेकिन आज तक किसी ने हमारी सुध नहीं ली। तीन बर्ष से हम पन्नी के नीचे जी रहे हैं। अब तो बरसात में बच्चों को भी ठण्ड लगने लगी है। बस डर है कि कहीं बीमारी न घेर ले। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि मक्कू के परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है। उनका मानना है कि प्रशासन को तुरन्त मदद करनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार यह मामला मानवता और सरकारी योजनाओं की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। अब देखना है कि स्थानीय प्रशासन इस परिवार की पीड़ा कब तक अनदेखी करता है या फिर उनकी जिन्दगी आने वाले दिनों में भी प्लास्टिक की पन्नी के सहारे ही गुजरेगी।




