मनरेगा योजना में जिम्मेदारों की खाऊ कमाऊ नीति से फंसा है भ्रष्टाचार के दलदल में

खेसरहा/सिद्धार्थनगर। विकास खण्ड खेसरहा के मनरेगा योजना में जिम्मेदारों की खाऊ कमाऊ नीति से भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा है। खेसरहा ब्लॉक के ग्राम पेड़ारी बुजुर्ग में 01 साइड पर 13 मास्टर रोल पर 126 श्रमिकों का फर्जी हाजिरी लग रहा है। खास बात यह है कि ऑनलाइन हाजिरी लगाये गये फोटो के अनुसार फोटो में वहीं मजदूर सभी साइड पर दिखाई दे रहा है। सूत्रों की माने तो इस साइड पर पहले से काम कराया जा चुका है। अब कार्य स्थल पर मजदूरों को खड़ाकर ऑनलाइन हाजिरी लगाई जा रही है। इन दिनों चर्चा है कि मनरेगा योजना में फर्जी मस्टररोल के खेल में ब्लॉक में बैठे जिम्मेदारों का मौन संरक्षण से जारी है। जिससे ग्राम पंचायत के जिम्मेदार इस योजना में फर्जी मस्टररोल का खेल करने से नहीं चूक रहे। वहीं सचिव, प्रधान, रोजगार सेवक सहित खण्ड विकास अधिकारी के मिलीभगत से फर्जी मस्टररोल का खेल जारी है। मामला विकास खण्ड खेसरहा के ग्राम पंचायत पेड़ारी बुजुर्ग का है। जहां पर मस्टररोल में कार्य कर रहे मजदूरों की संख्या के सापेक्ष से साइड पर कम से कम मजदूरों को खड़ाकर आनलाइन मोबाइल फोटो अपलोड कर एनएमएमएस जिम्मेदारों द्वारा किया जा रहा है। मजे की बात यह है कि डिमाण्ड मास्टर रोल 126 श्रमिकों की हाजिरी लग रहा है। वहीं आनलाइन मॉनिटरिंग 10 से 20 श्रमिको को खड़ा कर फोटो अपलोड किया जा रहा है। कमीशन के चक्कर में सचिव एवं खण्ड विकास अधिकारी खेसरहा सरकारी धनों को लूटने मे लगे हैं। कागजों में कराये जा रहे मनरेगा कार्यों के आनलाइन फर्जी हाजिरी का खेल कभी भी देखा जा सकता है। ग्राम पंचायत पेड़ारी बुजुर्ग में मनरेगा 126 श्रमिकों का फर्जी हाजिरी लग रहा है और जिम्मेदार मूकदर्शक बने हैं। आपको बता दें कि 126 श्रमिकों का फर्जी हाजिरी लग रहा है और साइड पर काम करने वाले श्रमिकों की संख्या लगभग 10 से 20 है। आखिर 10 से 20 मजदूर काम कैसे कर सकते है। सूत्रों के मानें तो विकास खण्ड खेसरहा के ग्राम पंचायत पेड़ारी बुजुर्ग में कार्य कोडरू3151013072/स्क्/958486255824849451, डेत छव.रू7903 एवं श्रमिक की संख्यारू126 व कार्य का नामरू रामदेव के खेत से नदी तक चकमार्ग पर मिट्टी पटाई कार्य है। वहीं फर्जी लगे हाजिरी के मुताबिक ग्राम पंचायत में नियुक्त तकनीकी सहायक बिना साइड पर गये ही आफिस मे बैठकर एमबी कर भुगतान के लिए पंचायत सचिव के टेबल होते हुए बीडीओ आफिस तक पहुंचती है और उस फाइल का भुगतान हो जाता है। अब देखना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार खेसरहा ब्लॉक के अधिकारियों द्वारा रुक पायेगा या नहीं?




