फैटी लिवर में कारगर होम्योपैथिक औषधियांरू खानपान और जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी- डॉ. भास्कर शर्मा

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इटवा/सिद्धार्थनगर।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। सिद्धार्थनगर के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड सहित सैकड़ों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. भास्कर शर्मा ने बताया कि यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और अधिकांश मामलों में शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।उन्होंने बताया कि लिवर शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पाचन में सहायता करने और ऊर्जा को संग्रहित करने का कार्य करता है। जब लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा होने लगती है और यह मात्रा 5 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो इसे फैटी लिवर रोग कहा जाता है।गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (छ।थ्स्क्)रू यह मोटापा, मधुमेह और इंसुलिन प्रतिरोध से जुड़ा होता है। इसका गंभीर रूप नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (छ।ैभ्) है, जिससे लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (।स्क्)रू अत्यधिक शराब सेवन के कारण होने वाला यह रोग समय के साथ गंभीर लिवर क्षति का कारण बन सकता है।मोटापा, टाइप-2 मधुमेह, इंसुलिन प्रतिरोध, उच्च कोलेस्ट्रॉल, गर्भावस्था, कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, हेपेटाइटिस-सी और कुछ आनुवंशिक कारण इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।शुरुआत में लक्षण कम दिखाई देते हैं, लेकिन बीमारी बढ़ने पर थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन, भूख कम लगना, वजन घटना, जी मिचलाना, पेट फूलना और आंखों या त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।डॉ. शर्मा के अनुसार, पालक, लौकी, कद्दू, पपीता, सेब, अमरूद, ओट्स, ज्वार और बाजरा जैसे खाद्य पदार्थ लाभकारी हैं। वहीं शराब, धूम्रपान, कोल्ड ड्रिंक, अधिक चीनी, मैदा, तली-भुनी चीजें, प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट से परहेज करना चाहिए।अल्ट्रासाउंड, लिवर फंक्शन टेस्ट (स्थ्ज्), फाइब्रोस्कैन और आवश्यकता पड़ने पर बायोप्सी कराई जा सकती है।डॉ. शर्मा ने बताया कि रोगी की शारीरिक एवं मानसिक प्रकृति के अनुसार ब्रायोनिया एल्ब 30, कैल्केरिया कार्ब 30, बोल्डो क्यू, पोडोफाइलम 30, चेलिडोनियम मैजुस, कार्डुअस मारिएनस, डोलिचोस 30, माइरिका सेरिफेरा क्यू, लाइकोपोडियम क्लैवेटम, नक्स वोमिका, कैल्केरिया कार्बाेनिका और फास्फोरस जैसी होम्योपैथिक औषधियों का उपयोग किया जाता है।हालांकि उन्होंने सलाह दी कि किसी भी दवा का सेवन स्वयं न करें। फैटी लिवर की पुष्टि के लिए आवश्यक जांच कराने के बाद योग्य चिकित्सक की सलाह से ही उपचार शुरू करना चाहिए। साथ ही नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन नियंत्रण इस बीमारी से बचाव और सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।




