स्कूल वैन, ऑटो और अन्य परिवहन साधन क्षमता से अधिक बच्चों को लादकर सड़कों पर भर रहे फर्राटा
यातायात नियमों की कर रहे अनदेखी, बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बिल्कुल गंभीर होता नजर नहीं आ रहा विद्यालय प्रबंधन

दैनिक बुद्ध का सन्देश
बहराइच। निजी स्कूलों की दादागिरी पर प्रशासन नतमस्तक दिखाई पड़ रहा है क्योंकि मोटी फीस और ट्रांसपोर्टिंग चार्ज वसूलने के बाद भी विद्यालय प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बिल्कुल गंभीर होता नजर नहीं आ रहा है। साथ ही साथ यातायात प्रबंधन भी सख्त नजर आता दिखाई नहीं पड़ रहा है। बहराइच जिले के शहर और ग्रामीण इलाकों में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों की जान हर दिन खतरे में रहती है क्योंकि स्कूल वैन, ऑटो और अन्य परिवहन साधन क्षमता से अधिक बच्चों को लादकर सड़कों पर फर्राटा दौड़ रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति बहराइच जिले के काफी जगह की बनी हुई है।
“‘खतरे की सवारी’ में तब्दील हो रही स्कूल की वैन”
शहर के कई स्कूलों की वैनों में 6 की जगह 12 से ज्यादा बच्चे बैठाए जा रहे हैं। कई वैनों में तो सीट बेल्ट, फर्स्ट एड किट तक मौजूद नहीं है। बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जाता है, जिससे दुर्घटना की संभावना हर वक्त बनी रहती है।
“अभिभावक की परेशानी को कोई सुनने वाला नहीं”
एक स्थानीय अभिभावक ने बताया, “स्कूल फीस के साथ हर महीने ₹3000 तक ट्रांसपोर्ट शुल्क चुकाना पड़ता है, लेकिन सुविधाएं और सुरक्षा नाममात्र भी नहीं मिलती।”
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल और ट्रांसपोर्ट संचालक मुनाफा कमाने में लगे हैं, जबकि प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
“एआरटीओ की सक्रियता दिखाई नहीं पड़ रही”
बहराइच जिले के एआरटीओ (सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। न तो स्कूली वाहनों की नियमित जांच हो रही है, न ही ओवरलोडिंग पर कार्रवाई। आरटीओ विभाग की इस लापरवाही को लेकर अभिभावकों में आक्रोश है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल वाहनों की समय-समय पर जांच के साथ ही ओवरलोडिंग पर तत्काल सख्त कार्रवाई के साथ ही ड्राइवरों का सत्यापन और प्रशिक्षण अनिवार्य करते हुए ट्रांसपोर्ट शुल्क की निगरानी के लिए समिति गठित कर स्कूल प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बाध्यता दी जाए। शहर में पहले भी कई बार स्कूली वाहनों से हादसे हो चुके हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला। अभिभावकों का कहना था कि क्या हादसे के बाद ही जागेगा प्रशासन




