सावन के महीने में बारिश न होने से आमजन हुआ बेहाल, किसानों के माथे पर पड़ रही चिंता की लकीर

बहराइच। ज्यादातर लोगों ने इस बार आशा एवं उम्मीद किया था कि सावन आएगा और पानी लायेगा लेकिन यह उम्मीद अब दिनों दिन क्षीण होती जा रही है क्योंकि बादलों का झुंड तो आ रहा है लेकिन बारिश जिस तरह होनी चाहिए उस तरह से बारिश नहीं हो रही है बल्कि सावन के इस महीने में कड़ाके की धूप और उमेश भरी गर्मी से आम जनजीवन बेहाल है किसानों को भी चिंता हो रही है कि आखिर धान की फसल कैसे पैदा होगी कब तक हम लोग सिंचाई के साधन से धान की फसल को पानी दे पाएंगे। चिंता की लकीर किसानों के माथे पर दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है किसान ट्रैक्टर की लगा करके बादलों की तरफ देख रहा है और कह रहा है कि काले मेघा काले मेघा पानी तो बरसाओ। यही कमोबेश स्थिति बहराइच जिले में बनी हुई है जिस शहर और ग्रामीण अंचल में बारिश न होने की वजह से अनेकों तरीके की बीमारियां हो रही है और कड़ी धूप और चिपचिपी गर्मी का सामना स्कूल जाने वाले बच्चे कर रहे हैं। श्रावण मास को वैसे तो बारिश का महीना माना जाता है, जब हरियाली और ठंडी फुहारें लोगों को राहत देती हैं, लेकिन इस बार मौसम ने रुख ही बदल लिया है। खेतों में धूल उड़ रही है और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। जलस्तर में गिरावट आने से पेयजल संकट की स्थिति भी बनने लगी है। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग दिनभर घरों में दुबके रहते हैं और जरूरी काम भी सुबह-शाम ही निपटा रहे हैं। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और बीमार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणी भी लगातार बदल रही है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब लोगों की एक ही दुआ है कि श्रावण में एक झमाझम बारिश हो जाए ताकि गर्मी से राहत मिले और खेतों में हरियाली लौट आए।




