थाने में हुई पिटाई से आहत सलमान ने की थी खुदकुशी, इस मामले पर अब एनएचआरसी ने अपनाया सख्त रवैया

बरेली। क्योलड़िया थाना क्षेत्र में पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर फांसी लगाकर जान देने वाले 18 वर्षीय युवक सलमान की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सख्त रुख अपनाया है। समाजसेवी महेश पांडेय की शिकायत पर आयोग ने पुलिस और जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है। आयोग ने इसे प्रथम दृष्टया गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन माना है। आपको बता दें कि सलमान पर आरोप था कि उसने एक लड़की को भगाने में अपने दोस्त की मदद की थी। उसका जुर्म केवल इतना ही था कि उसने अपने मोबाइल से एक लड़की से अपने दोस्त की बात कराई थी। इसके बाद पुलिस ने उसे बार-बार थाने बुलाया और बेरहमी से पीटा। परिजनों के मुताबिक, पुलिस उसे थर्ड डिग्री देती रही। उसे जेल भेजने की धमकी दी गई। दबाव इतना बढ़ा कि एक मई की शाम सलमान ने फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। सलमान के पिता अशफाक ने बताया, है कि मैंने अपने बेटे को बचाने के लिए पहले 6,500 और फिर 50,000 रुपए की रिश्वत भी दी। इसके लिए उधार लेना पड़ा। मगर पुलिस वालों ने मेरे बेटे को फिर भी नहीं छोड़ा। मारते रहे, धमकाते रहे… यहां तक कह दिया कि इसकी हड्डियां तोड़ देंगे। परिजन बताते हैं कि सलमान पुलिस की पिटाई के बाद तीन दिन तक चुपचाप बैठा रहा। वह गहरे सदमे में था। किसी से बात नहीं करता था। फिर एक मई की शाम को उसने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। सलमान घर का इकलौता सहारा था। सिलाई का काम करता था और 6 बहनों, 2 भाइयों और बूढ़े मां-बाप की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। सलमान को दफनाने के लिए भी पिता को उधार लेना पड़ा था। इस प्रकरण को लेकर समाजसेवी महेश पांडेय ने कहा कि सलमान बेकसूर था। सिर्फ एक प्रेम प्रसंग में दोस्त की मदद करने के शक में उसे थाने बुलाकर थर्ड डिग्री देना और जेल भेजने की धमकी देना अमानवीय है। मैंने इस मामले को एनएचआरसी में उठाया और आयोग ने इसे गंभीर माना है।



