शबे कद्र की रात में इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बुलंद होते हैं -हाफिज मोहम्मद हुसैन
डुमरियागंज के औसानपुर में 29 सबे कद्र की रात में कुरआन की तेलावत करते हक़ीदतमंद

सिद्धार्थनगर। मुसलमान के लिए रमजान का महीना बहुत अहम माना जाता है क्योंकि इस महीने में अल्लाह अपने मोमिन बन्दों पर इस महीने में रहमतों का नूजूल फरमाता है रमजान के इस महीने में 29 वे सबे कद्र की रात को डुमरियागंज क्षेत्र के औसानपुर वार्ड नंबर सात के सुन्नी जामा मस्जिद में बूढ़े नोजावान और छोटे-छोटे बच्चों ने अल्लाह को राजी करने के लिए कुरान की तिलावत कर आपसी भाईचारा और मुल्क के शांति के लिए सभी लोगों ने दुआ मांगी और वहीं पर हाफिज मोहम्मद हुसैन ने बताया कि रमजान के महीने में अंतिम अशरे में से एक रात ऐसी भी आती है जो हजार महीने की रात से बेहतर है जिसे शबे कद्र कहा जाता है यानी लोगों की दुआओं का कबूल होने वाली रात होती है और कहा कि एक रात की इबादत हजार महीनों से बेहतर और अच्छा है इस रात अल्लाह ताला अगले साल के लिए बंदों की जिंदगी मौत और रिज्क व सेहत का फैसला करता है इसी रात में कुरान माजीद की शुरुआत हुई थी इसलिए इस रात की फजीलत कुरान मजीद और रसूल मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हदीसों में जिक्र है इस रात में अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दजें बुलंद होते हैं और गुनाहों को बक्स दिया जाता है व दोजख की आग से निजात मिलती है।इस दौरान मौलाना अब्दुल रशीद, हाफिज मोहम्मद हुसैन, हाफिज जावेद अहमद, दिलशाद अहमद, बिलाल अहमद, अब्दुल वली, फैजान अहमद ,अब्दुल करीम, दिलशाद अहमद, अतीकुर्रहमान, नेमुअल्लाह, शान अली, आसिफ अली, अयाज अहमद, फरहान, अहमद, शाहबाज अहमद, इरफान अहमद, शहजाद अहमद ,डॉक्टर ताहिर, अजीज अहमद, सभी लोगों ने रात भर इबादत कर आपसी भाईचारा व मुल्क की शांति के लिए दुआ मांगी।




