आर्य समाज व्यक्ति विरोधी नहीं बल्कि पाखंड विरोधी है: स्वामी ओमानंद

उतरौला/बलरामपुर। आर्य समाज बाहरी आडंबरों कुरीतियों और भ्रांतियां का विरोध करता है। हमारा उद्देश्य समाज में समानता लाने छुआछूत का भाव मिटाने एकात्म ईश्वर की आराधना करने का है। ऋषि दयानंद ने इसी संदेश को व्यापक रूप से फैलाने के लिए आर्य समाज की स्थापना की थी। वेदों का पढ़ना पढ़ाना तथा वेदों के अनुकूल आचरण करना आर्य समाज हमारा संदेश है। आर्य समाज के वार्षिकोत्सव के प्रथम दिन आर्य समाज मंदिर परिसर में सत्संग करते हुए नोएडा से आए स्वामी ओमानंद परि व्राजक ने कहा कि आर्य समाज व्यक्ति विरोधी नहीं है बल्कि पाखंड का विरोधी है। भजनोपदेशिका गीता आर्य ने भजनों के माध्यम से आर्य समाज के संदेश और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए आह्वान किया की सभी लोग वेदों के बताए मार्ग पर चलें। इससे उनका मानव जीवन सार्थक हो सकेगा बहराइच के आर्य विद्वान ठाकुर प्रसाद आर्य ने कहा कि आर्य का शाब्दिक अर्थ श्रेष्ठ होता है। कृण्वंतो विश्वम् आर्यम् का संदेश लेकर लोगों के बीच इसीलिए जाते है ताकि लोग आर्य बनकर अपना, अपने परिवार का व अपने समाज का जीवन सार्थक कर सकें। कार्यक्रम के संचालन में दिलीप आर्य, सुधांशु आर्य, रामदेव आर्य, श्रवण आर्य, सचिन कुमार, दिनेश आर्य, सतीश कुमार, रामपाल विद्या वाचस्पति, महेश कुमार, लक्ष्मी देवी, कुसुम देवी समेत अनेक लोगों का योगदान सराहनीय रहा।



