राम कथा श्रवण मात्र से मिलता है मोक्ष: कंचन किशोरी जी

कुशीनगर/बोदरवार। विकास खण्ड कप्तानगंज के सोमली ग्राम सभा में लगातार बारहवें वर्ष चल रहे श्री विष्णु महायज्ञ के तीसरे दिन कथा का रसपान कराते हुए कथाबाचिका कंचन किशोरी जी ने दशरथ द्वारा पुत्र प्राप्ति हेतु किये गये यज्ञ तथा रामजन्म प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया एवं रामलीला कलाकारो द्वारा रावण मंदोदरी विवाह तथा देवताओं पर रावण विजय की अलौकिक प्रस्तुती कर दर्शको का मन मोह लिया। सोमली धाम में चल रहे महायज्ञ के तीसरे दिन कथा का रसपान कराते हुए कंचन किशोरी जी ने कहा महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए ने यज्ञ किया । महाराजा दशरथ ने श्यामवर्ण घोड़े को चतुररंगिनी सेना के साथ छोड़ने का आदेश दिया ।महाराज ने समस्त मनस्वी विद्वान ऋषि मुनियों तथा वेद विज्ञ प्रकांड पंडितों को बुलावा भेजा ।वह चाहते थे कि सभी यज्ञ में शामिल हो यज्ञ का समय आने पर महाराज दशरथ सभी अभ्यागतों और अपने गुरु वशिष्ट जी समेत अपने परम मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जामाता श्रृंग ऋषि के साथ यज्ञ मंडप में पधारे। फिर विधिवत यज्ञ शुभारंभ किया गया ।यह की समाप्ति के बाद समस्त पंडितो ब्राह्मण ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य आदि भेंट की गई। तत्पश्चात उन्हें सादर विदा दिया गया। महराज ने यज्ञ की समाप्ति के बाद समस्त पंडितों ब्राह्मण ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य दिया। यज्ञ के प्रसाद में बनी खीर अपनी तीनों रानियां को दी। प्रसाद ग्रहण करने के बाद तीनों रानियां गर्भवती हो गई ।सबसे पहले महाराज दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या ने एक शिशु को जन्म दिया। जो बेहद ही काम तेज्वी नीलबर्ण और तेजोमय थे ।शिशु का जन्म चौत मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ। पुनर्वसु में सूर्य मंगल शनि बृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थान में विराजित थे। कर्क लग्न का उदय हुआ था फिर शुभ नक्षत्र में कैकेई और सुमित्रा ने भी अपने पुत्रों को जन्म दिया। कैकई का एक और सुमित्रा के दोनों पुत्र बेहद तेजस्वी थे। महाराज के चारों पुत्रों के जन्म से संपूर्ण राज्य में आनंद का माहौल था। हर कोई खुशी में गंधर्वगान कर रहा था। नृत्य कर रही थी देवताओं ने अप्शराएं नृत्य कर रही थी। देवताओं ने पुष्प वर्षा की। महाराज ने ब्राह्मण और याचकों को दान दक्षिणा दी। उन सभी ने महाराज के पुत्रों को आशीर्वाद दिया। प्रजा जनों को महाराज ने धन-धान्य और दरबारियों को रत्न आभूषण भेज दी ।महर्षि वशिष्ठ ने महाराज के पुत्रों का नाम रामचंद्र भरत लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा।अयोध्या धाम से पधारें सरजू दास लीला मण्डली के कलाकारों ने देवताओं पर रावण का विजय तथा रावण मंदोदरी विवाह का सजीव मंचन कर दर्शको को भावविभोर कर दिया। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष व ग्राम प्रधान त्रियुगी नारायण पटेल ,संयोजक गुड्डू पटेल ,उपाध्यक्ष राजू यादव ,अप्पू शुक्ला ,दीपक ,करन ,प्रवीण यादव व दिलीप सहित सैंकड़ों श्रद्धालु श्रोता कथा में मौजूद रहे है।




