ईश्वर के चरणों में शरणागति सर्वश्रेष्ठ साधन- आचार्य हरिवेन्द्र

बांसी। पथरा बाजार क्षेत्र के ग्राम कम्हरिया खुर्द में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार की रात कथा वाचक ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन बडे ही सुंदर ढंग से सुनाया।कथा प्रवचन के दौरान आचार्य हरिवेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण पूतना का विष लगा हुआ स्तनपान करते समय पूतना को दोनों हाथों से पकड़े हुए थे वह पूतना कितनी सौभाग्यशालिनी है कि उसे स्वयं ब्रह्म ने पकड़ा है इसका भाव यह है कि परमात्मा ईश्वर को दो तरह की गति प्रदान करते हैं मर्कट गति और मार्जार गति। मर्कट गति का मतलब होता है जैसे बंदरिया का बच्चा अपनी मां बंदरिया को पकड़े रहता है और मार्जार मतलब बिल्ली स्वयं अपने बच्चों को मुख से पकड़ के यहां से वहां करती रहती है। बंदरिया का बच्चा अगर पकड़ने में त्रुटि करता है तो गिरने का भय रहता है । इस तरह से मनुष्य उसे परमात्मा को ज्ञान कर्म और योग के द्वारा पकड़ना चाहता है तो विधि के लोप होने से पतन का भय रहता है। और बिल्ली के बच्चे की तरह अगर शरणागति और भक्ति का भाव रखता है तो उसमें पतन का भय कदापि नहीं रहता है। अतः मनुष्य के कल्याण के लिए सर्वश्रेष्ठ साधन और माध्यम भगवत भक्ति और शरणागति है। इस अवसर दिलीप कुमार सिंह, रिंकू सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।




