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इसकंपकपाती हाड़तोड़ ठंड से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है: डॉ अश्विनी कुमार चौधरी

बांसी। दिसम्बर माह के अन्त में ठंडक ने अपना रूप में बदलाव शुरू किया और नया साल लगते ही ठंड ने अब अपनने रौद्र रूप को दिखाना शुरू कर दिया है। इस हाड़तोड़ ठंड से बचा जाना चाहिए। नए साल से शुरू हुए तेज गलन भरी ठंड को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बांसी में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ अश्विनी कुमार चौधरी ने बताया कि 60 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों तथा 06 वर्ष से कम के उम्र के बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।ब्लडप्रेशर, अस्थमा (श्वसन तंत्र संबंधी रोग), हृदय रोग, टीबी, कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को अनावश्यक घर से नहीं निकलना चाहिए। थोड़ी सी असावधानी भारी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि उक्त आयु वर्ग के लोगों को अपने पूरे शरीर को मोटे व ऊनी कपड़ों, कम्बल तथा रजाई से ढंक कर रखा जाना चाहिए। गुनगुना पानी पिएं और गर्म जल से ही स्नान करें। यदि ब्लडप्रेशर व शुगर के मरीज हैं, तो तत्संबंधित दवा नियमित रूप से लेते रहें। अपने ब्लडप्रेशर की नियमित जांच कराते रहें। उन्होंने कहा कि यदि सुबह सूर्याेदय से पूर्व की सैर के आदती हैं तो अगले कुछ दिनों तक, जब तक कि मौसम कुछ गर्म न हो जाए इसे बन्द कर दें। यदि अस्थमा के मरीज हैं और ष्इनहेलरष् का प्रयोग करते हैं तो इसे इस भयंकर ष्कोल्ड वेवष् में फिलहाल नियमित रूप से करते रहें। सर्दी का सितम अभी आगे कुछ दिनों तक चलने की संभावना है। इसलिए मौसम संबंधी चेतावनी का कड़ाई से पालन करें। इधर शादी-ब्याह का सीजन शुरू हो चुका है। इसमें देर रात तक कार्यक्रम चल रहे हैं। अस्थमा, ब्लडप्रेशर, बुजुर्ग, शिशु और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग देर रात तक चलने वाले ऐसे कार्यक्रमों में भागीदारी करने से परहेज करें। बहुत जरूरी न हो तो सार्वजनिक कार्यक्रमों से भी परहेज करें। अपनी सुरक्षित जिंदगी के लिए कुछ दिनों तक सामाजिक न होने के अपने ऊपर लगने वाले लांछन की अनदेखी करें।

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