गोरखपुर        महराजगंज        देवरिया        कुशीनगर        बस्ती        सिद्धार्थनगर        संतकबीरनगर       
उत्तर प्रदेशब्रेकिंग न्यूज़सिद्धार्थनगर

बांसी : विवेकानन्द कहते थे उठो जागो और अपने लक्ष्य तक रुको मत-डा सन्तोष कुमार सिंह

स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय विचारों से लोगों को परिचित कराया-डा अरविन्द कुमार मौर्य

दैनिक बुद्ध का संदेश

बांसी। स्थानीय रतन सेन डिग्री काॅलेज में स्वामी विवेकानन्द जी जयन्ती ‘‘राष्ट्रीय एकता दिवस’’ को राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक/स्वयंसेविकाओं द्वारा मनाया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ0 संतोष कुमार सिंह ने माँ सरस्वती व स्वामी विवेकानन्द के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से किया। डाॅ0 अरविन्द त्रिपाठी ने कहा स्वामी विवेकानन्द जी का जन्म दिवस प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है।

देश के युवाओं को समर्पित इस दिन को मनाने का एक खास मकसद होता है। स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बचपन से ही आधात्म में रूचि रखने वाले नरेंद्रनाथ ने 25 साल की उम्र में संन्यास ले लिया। संन्यास लेने के बाद वह दुनिया भर में विवेकानंद नाम से मशहूर हुए। वह वेदांत के एक विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। डाॅ0 अरविन्द कुमार मौर्य ने अपनी बात राष्ट्रीय युवा दिवस 2025 की थीम प्रारम्भ की “युवा एक स्थायी भविष्य के लिए: लचीलेपन और जिम्मेदारी के साथ राष्ट्र को आकार देना” उन्होंने कहा स्वामी विवेकानंद जी वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो में धर्म सम्मेलन के आयोजन में विवेकानंद ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। यहां उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत जैसी ही मेरे प्रिय अमेरिकी भाइयों और बहनो के साथ कीया पूरी सभा तालियों से गूंज गई। भाषण के दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति के विचारों से लोगों को परिचित कराया समाज में फैली बुराइयों पर जमकर कुठाराघात किया। वहां मौजूद सभी लोग युवा विवेकानंद से अभिभूत थे। 1894 में न्यूयॉर्क में इन्होंने वेदान्त सोसाइटी की स्थापना की। डाॅ0 रामबाबू ने कहा विवेकानंद विदेश दौरे पर थे और अलग.अलग जगहों पर अपना व्यांख्यान दे रहे थे। ऐसे ही एक भाषण को सुनकर प्रभावित हुई एक महिला उनके पास आई और बोली कि वो उनसे शादी करना चाहती है जिससे उसे भी उनकी ही तरह प्रतिभाशाली पुत्र मिले। उस महिला की बात सुनकर स्वामी जी बोले कि वो एक सन्यासी हैं और इस वजह से शादी के बंधन में नहीं बध सकते हैं। इसलिए वो पुत्र बनना स्वीकार कर सकते हैं। ऐसा करने से न तो उनका सन्यास टूटेगा और उन्हें भी पुत्र हासिल हो जाएगा। ये सुनकर उस महिला की आंखों से आंसू गिर पड़े और वो स्वामी जी के चरणों में गिर पड़ी और बोली कि आप धन्य हैं। आप ईश्वर के रूप हैं जो किसी भी बुरे समय में भी विचलित नहीं होते हैं। डाॅ0 हंसराज कुशवाहा ने बताया एक बार स्वामी विवेकानन्द अपने आश्रम में सो रहे थे कि तभी एक व्यक्ति उनके पास आया जो कि बहुत दुखी था और आते ही स्वामी विवेकानन्द के चरणों में गिर पड़ा और बोला महाराज मैं अपने जीवन में खूब मेहनत करता हूँ हर काम खूब मन लगाकर भी करता हूँ फिर भी आज तक मैं कभी सफल व्यक्ति नहीं बन पाया। उस व्यक्ति कि बाते सुनकर स्वामी विवेकानंद ने कहा ठीक है। आप मेरे इस पालतू कुत्ते को थोड़ी देर तक घुमाकर लाये तब तक आपके समस्या का कोई समाधान ढूँढ़ता हूँ। इतना कहने के बाद वह व्यक्ति कुत्ते को घुमाने के लिए चला गया। और फिर कुछ समय बीतने के बाद वह व्यक्ति वापस आया तो स्वामी विवेकानन्द ने उस व्यक्ति से पूछा की यह कुत्ता इतना हाँफ क्यों रहा है। जबकि तुम थोड़े से भी थके हुए नहीं लग रहे हो आखिर ऐसा क्या हुआ ? इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि मैं तो सीधा अपने रास्ते पर चल रहा था जबकि यह कुत्ता इधर उधर रास्ते भर भागता रहा और कुछ भी देखता तो उधर ही दौड़ जाता था. जिसके कारण यह इतना थक गया है । इस पर स्वामी विवेकानन्द ने मुस्कुराते हुए कहा बस यही तुम्हारे प्रश्नों का जवाब है। तुम्हारी सफलता की मंजिल तो तुम्हारे सामने ही होती है. लेकिन तुम अपने मंजिल के बजाय इधर उधर भागते हो जिससे तुम अपने जीवन में कभी सफल नही हो पाए यह बात सुनकर उस व्यक्ति को समझ में आ गया था की यदि सफल होना है तो हमे अपने मंजिल पर ध्यान देना चाहिए। प्राचार्य डाॅ0 संतोष कुमार सिंह ने कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले समस्त स्व्यंसेवक/स्वयंसेविकाओं का आभार व्यक्त किया और अपनी जगह से उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत से समाप्त किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक/स्वयंसेविकायें कुमकुम, शालू, सपना, सुमन, शालिनी, ममता, संध्या, श्रेया, निधि, मुस्कान, प्रीति, लक्ष्मी, सुधा, सलोनी, धीरज, शबाना, संचिता, फातमा व अन्य स्वयंसेवक/स्वयंसेविकाओं ने अपने विचार व भाषण स्वामी विवेकानन्द जी पर प्रस्तुत किया।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!