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गोंडा : महिला ग्राम प्रधानों की सीमाएं घर के चौखट तक सीमित

जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी महिला प्रधानों के प्रतिनिधियों का बोलबाला

दैनिक बुद्ध का संदेश/बृजभूषण तिवारी
गोंडा। अधिकारियों की संलिप्तता होने के कारण महिला प्रधानों की अधिकारों का हनन किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) आवास प्लस की सूची में पात्र लाभार्थियों के नाम जोड़ने के संबंध में विकास खंड कार्यालय पर ग्राम प्रधानों एवं सचिव के साथ बैठक कर नियमावलियों के बारे में जानकारी दी जानें के लिए बुलाया गया लेकिन आकांक्षी ब्लॉक होने के नाते आरक्षित की गई ग्राम पंचायतों के महिला प्रधानों के द्वारा बैठक में शामिल नहीं हो सकी जिसका मुख्य कारण जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता होने से महिला ग्राम प्रधानों के प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया। क्योंकि गांवों की विकास की रेखा प्रतिनिधियों के हाथों में है जैसे क्षेत्र के कई ग्राम पंचायत के महिला ग्राम प्रधानों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पात्रता के नियमावलियों की जानकारी नहीं हो सकी सिर्फ बैठक खाना पूर्ति कर इति श्री कर दिया। मामला विकास खण्ड रुपईडीह से जुड़ा हुआ है जहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत ग्राम प्रधान एवं सचिव की एक बैठक ब्लाक मुख्यालय के सभागार में की गई जिसमें प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) योजना के नए नामों को जोड़ने हेतु शासन के दिशा निर्देशों की जानकारी दी गई। विकासखंड रूपईडीह के 106 ग्राम पंचायत के सापेक्ष 48 ग्राम पंचायतें महिला आरक्षित किया गया था जिसमें महिला प्रधानों की भागीदारी थी।

शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार बैठक में महिला प्रधानों के द्वारा प्रतिभाग नहीं किया गया जबकि जिला अधिकारी के द्वारा दिशा निर्देश जारी किया गया था कि ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि नहीं हो सकते। लेकिन ज्यादा तर महिला ग्राम प्रधानों के प्रतिनिधियों के द्वारा बैठक में शामिल हुए और महिला ग्राम प्रधानों के प्रतिनिधियों का दबदबा बना रहा जबकि जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं की गई ।जिससे सरकार के द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देश महिला ग्राम प्रधानों तक कैसे पहुंचेगा यह यक्ष प्रश्न चिन्ह बना हुआ है। जहां तक जिले की कमान संभाल रही महिला है। जिला अधिकारी नेहा शर्मा के द्वारा स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया गया था कि ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि नहीं हो सकते लेकिन ब्लॉक मुख्यालय पर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के बैठक में ज्यादा से ज्यादा महिला ग्राम प्रधानों की प्रतिनिधियों के द्वारा प्रतिनिधित्व करते हुए देखा गया जिससे आज भी महिला ग्राम प्रधानों की सीमाएं घर के चहारदीवारी के अंदर चौखट तक सीमित रह जाना यह यक्ष प्रश्न चिन्ह बना हुआ है। ग्राम पंचायत में होने वाले पात्रता आवासों की सूची, पेंशन, योजनाओं एवं गांवों के विकास का जिम्मा महिला प्रधानों के हाथों में जनता ने सौंपी थी।लेकिन महिला ग्राम प्रधानों के परिवारों ने ऐसा खेल खेला कि गांव की सरकार चलाने लगें और सरकार के द्वारा दिए गए निर्देशों से महिला प्रधानों को जानकारियां नहीं मिली पा रही है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी अभय कुमार सिंह ने कहा कि कुछ जगहों पर ऐसा हुआ था इस बार आवास के मामले को लेकर जानकारी दी जानी थी अगली बार बैठक में महिला ग्राम प्रधानों को ही बुलाया जाएगा जिससे सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में उन तक जानकारी पहुंच सके वही एक सवाल में उन्होंने कहा कि यह सूचना के लेकर बैठक की गई थी। इस अवसर पर एडीओ आईएसबी आजम खां, ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष यमुना प्रसाद, रामायण प्रजापति, अमरजीत, प्रधान संघ अध्यक्ष अमित अवस्थी, बृजेंद्र नाथ शुक्ला, प्रेम उपाध्याय, मदन मोहन पांडेय, काली प्रसाद शुक्ल, अफसर खा रवि मिश्रा आदि उपास्थिति रहे।

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