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रामपुर : जिले में साठा धान की खेती पर रोक

दैनिक बुद्ध का संदेश
रामपुर। जिलाधिकारी जोगिन्दर सिंह द्वारा जनपद में लगने वाले ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान की खेती प्रतिबंधित की गयी है। विगत वर्षों में जनपद में लगभग 25000 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान की खेती प्रति वर्ष की जाती रही है। ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान की खेती माह फरवरी से प्रारम्भ होकर माह मई तक की जाती है। इस समय वर्षा की कोई सम्भावना नहीं होती है एवं ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान की खेती पूर्ण रूप से भूमिगत जल पर आधारित रहती है। जल के अत्याधिक दोहन से भूमिगत जल का स्तर निरन्तर नीचे जा रहा है एवं निकट भविष्य में जल संकट उत्पन्न हो सकता है। जिला कृषि अधिकारी नरेन्द्र पाल ने बताया कि ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान की खेती करने से पूर्व खेत की तैयारी के समय खेत में पानी भरकर पडलिंग की प्रक्रिया की जाती है जिससे मिट्टी की सतह कठोर हो जाती है एवं वर्षा काल में वर्षा का जल जमीन के अन्दर नहीं जा पाता है साथ ही मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान की फसल तैयार होने के बाद अवशेषों को भी कृषकों द्वारा जलाया जाता है जिससे वायु प्रदूषण होता एवं मानव स्वास्थ्य पर उसका कु-प्रभाव पड़ता है।

वैज्ञानिक शोध के आधार पर पाया गया है कि एक किलोग्राम चावल उत्पादन में लगभग 4800 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान के स्थान पर अन्य कम पानी चाहने वाली एवं अधिक लाभ देने वाली फसलें विकल्प के रूप में उपलब्ध है. जैसे उड़द, मूंग, सूरजमुखी, मक्का, सब्जियाँ आदि फसलें आदि। इन फसलों की पकने की अवधि भी कम होती है तथा जिसके फलस्वरूप खरीफ फसलों की बुवाई भी ससमय की जा सकती है। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में जनपद में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कैच द रेन अभियान चलाया गया जिसके अन्तर्गत सरकारी भवनों, निजी भवनों, निजी/सरकारी विद्यालयों, ओद्योगिक प्रतिष्ठानों आदि पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, मनरेगा के अन्तर्गत तालाब निर्माण, खेत तालाब का निर्माण, अमृत सरोवर का निर्माण, तालाबों में रिचार्जिंग साफ्ट, सब सर्फेस डाइक, सोक पिट, चेक डेम डिसिलटिंग, कन्टूर बांध/मार्जिनल बांध का निर्माण व्यापक स्तर पर कराया गया एवं वृक्षारोपण का कार्य भी वृहद स्तर पर कराया गया जिसके कारण जल स्तर में सुधार हुआ है परन्तु ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान के कारण प्रयासों से प्राप्त परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जनपद में कहीं-कहीं पर कुछ लोगों द्वारा ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान की नर्सरी डालने की सूचनाएं प्राप्त हो रही है जिन्हें जिला प्रशासन द्वारा शीघ्र ही नष्ट करा दिया जायेगा। इसके अतिरिक्त ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान के स्थान पर अन्य कम पानी चाहने वाली एवं अधिक लाभ देने वाली फसलें जैसे उड़द, मूंग, सूरजमुखी, मक्का, सब्जियाँ आदि फसलों के बीज जनपद के बीज बिक्री केन्द्रों पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कृषक ग्रीष्म कालीन धान/साठा धान के स्थान पर उड़द, मूंग, सूरजमुखी, मक्का, सब्जियाँ आदि फसलों को अपनाएं।

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