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सिद्धार्थनगर : नैक द्वारा मूल्यांकन कराए जाने को लेकर कार्यशाला का आयोजन

दैनिक बुद्ध का संदेश
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में राष्ट्रीय प्रत्यायन एवं मूल्यांकन परिषद नैक द्वारा मूल्यांकन कराए जाने के संबंध में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफ़ेसर हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहा की वर्तमान वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता शिक्षण और शोधपरक दृष्टि का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय अत्यंत ही पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है। इस दृष्टि से उच्च शिक्षा के मानक संस्थान के रूप में विश्वविद्यालय सहित संबद्ध महाविद्यालयों को अधिक ऊर्जा और साधना के साथ कार्य करना होगा। नैक हमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित होने में सबसे सहायक साधन के रूप में है।

नैक के मानकों के अनुरूप शिक्षण संस्थान के क्रियाकलाप योजनाओं और व्यवस्थाओं की स्थापना करके ग्रामीण क्षेत्र के और पिछड़े हुए बच्चों को भी हम योग्य और दक्ष बना सकते हैं। प्रो हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहा बहुत जरूरी है की वर्तमान शिक्षा में उपयोग होने वाले तकनीको और नए नए अनुसंधानों को वरीयता के साथ शिक्षण प्रशिक्षण में शामिल करें।वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश शासन की स्पष्ट मंशा है कि विश्वविद्यालय सहित संबद्ध सभी महाविद्यालयों में तथा शीघ्र नैक की तैयारी करके नैक की प्रक्रिया कराने की तरफ अग्रसर हो। नैक एक सकारात्मक सोच है। जिसके माध्यम से निरंतर प्रयास और श्रेष्ठ कार्य पद्धति से हम अच्छा स्थान प्राप्त कर सकते हैं। इस अवसर पर गोरखपुर एवं बस्ती मंडल के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ अश्वनी कुमार मिश्र ने नैक प्रक्रिया क्रियान्वयन विषय पर पावर प्वाइंट के माध्यम से नैक की तैयारियों और अच्छा अंक प्राप्त करने की योजना पर विस्तृत रूप से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत ही व्यापक होता है। पाठ्यक्रमों के साथ-साथ उच्च शिक्षण संस्थान का सरोकार समाज से लेकर विद्यार्थी के संस्कार निर्माण तक होता है। किसी भी संस्थान के उत्तरोत्तर विकास के लिए उसका आत्म मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक होता है। नए प्रत्येक शिक्षण संस्थान को बेहतर तैयारी के साथ निश्चित समय सीमा के अंदर अंदर मूल्यांकन कर अपने को और श्रेष्ठ करने का अवसर प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। भविष्य में नैक द्वारा प्राप्त प्रमाणपत्र के बगैर उच्च शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व में रहना कठिन है। अनुदान इत्यादि भी नए रैंकिंग के आधार पर ही विद्यालयों को भी मिलने की योजना बनाई जा रही है। एकेडमिक ऑडिट ग्रीन आडिट और फाइनेंसियल आडिट के माध्यम से शिक्षण संस्थान अपनी प्रगति का मार्ग सुनिश्चित करते हैं। नए हमें अपना सामर्थ और अपनी कमजोरी तथा भविष्य की चुनौतियों की तरफ स्पष्ट रूप से पहचान करने में भी नैक महत्वपूर्ण है। शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नैक द्वारा मूल्यांकन अत्यंत ही आवश्यक है। इसके लिए शिक्षण संस्थानों को अपनी स्वयं की वेबसाइट की स्थापना करना, वेबसाइट पर लगातार उपयोग से ही उसको आगे बढ़ने का रास्ता मिलेगा। सभी गतिविधियां वेबसाइट पर समयानुसार अपलोड किया जाना चाहिए। आइक्यूएसी, वार्षिक कैलेंडर ,प्रशासनिक समितियां, विविध गतिविधियां, महिला सुरक्षा सेल, दिव्यांगजन के लिए की गई व्यवस्था, एंटी रैगिंग सेल, पुरातन छात्र परिषद, शिक्षक अभिभावक संघ इत्यादि के माध्यम से भी शिक्षण संस्थान आगे बढ़ सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन एवं प्रस्ताव की आइक्यूएसी के समन्वयक प्रोफ़ेसर दीपक बाबू ने किया जबकि आभार ज्ञापन प्रोफेसर सौरव द्वारा किया गया इस अवसर पर कुलसचिव डॉ अमरेंद्र कुमार अधिष्ठाता कला संकाय प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य गण तथा विश्वविद्यालय नए स्टेरिंग कमेटी के सभी कोऑर्डिनेटर एवं सदस्य तथा विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं अन्य महाविद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे। उक्त जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ अविनाश प्रताप सिंह ने दी है।

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