पिता ने निभाई ‘मां’ की भूमिका, कंगारू केयर से नवजात को मिली नई जिंदगी
बलहा (बहराइच)। जनपद के बलहा ब्लॉक अंतर्गत मथुरा गांव से एक प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने अपने नवजात बेटे को बचाने के लिए पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर अनूठी मिसाल पेश की। पेशे से राजगीर मिस्त्री राजेश ने कंगारू मदर केयर (केएमसी) अपनाकर अपने बच्चे को नई जिंदगी दी।
जानकारी के अनुसार, 30 सितंबर को सीएचसी नानपारा में जन्मे शिशु का वजन महज 2000 ग्राम था और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। हालत गंभीर होने पर उसे एसएनसीयू रेफर किया गया, लेकिन परिजन निजी अस्पताल ले गए। वहां चार दिनों में लगभग 42 हजार रुपये खर्च होने के बावजूद बच्चे की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उसका वजन घटकर 1900 ग्राम रह गया।
घर लौटने पर आशा कार्यकर्ता कमला देवी ने परिवार को केएमसी अपनाने की सलाह दी। इस दौरान मां सुनीता के बीमार होने के कारण पिता राजेश ने जिम्मेदारी संभाली और लगातार 25 दिनों तक रोज 8 से 10 घंटे नवजात को सीने से लगाए रखा।
इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम सामने आया और शिशु का वजन 1900 ग्राम से बढ़कर 2900 ग्राम हो गया। राजेश ने बताया कि यह तरीका बेहद सरल, सुरक्षित और बिना खर्च का है, जिसमें केवल समय और समर्पण की आवश्यकता होती है।
शिशु की मां सुनीता ने बताया कि शुरुआत में उन्हें इस विधि पर भरोसा नहीं था, लेकिन बच्चे में सुधार देखकर उनका विश्वास बढ़ा और अब वे अन्य महिलाओं को भी इसके प्रति जागरूक कर रही हैं।
एसएनसीयू इंचार्ज डॉ. अली के अनुसार, कम वजन और समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशुओं के लिए कंगारू मदर केयर बेहद प्रभावी उपाय है, जिससे शिशु की स्थिति में 90 प्रतिशत तक सुधार संभव है।
सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि जनपद में केएमसी को बढ़ावा देने के लिए सभी सीएचसी में बेड आरक्षित किए गए हैं और एसएनसीयू में 17 बेड का विशेष वार्ड संचालित है। पिछले चार वर्षों में 3500 से अधिक नवजातों को इसका लाभ मिल चुका है।
क्या है केएमसी?
कंगारू मदर केयर में नवजात को मां या परिवार के सदस्य के सीने से त्वचा-से-त्वचा संपर्क में रखा जाता है, जिससे उसे गर्माहट, सुरक्षा और पोषण मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार में कम से कम एक घंटे तक यह प्रक्रिया अपनाना लाभकारी होता है।
समर्पण और जागरूकता की यह कहानी समाज के लिए एक प्रेरणा बन गई है।




