डिड़ई शिवनगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भव्य पथ संचलन, अनुशासन व राष्ट्रभक्ति से गूंज उठा क्षेत्र

बांसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के तत्वावधान में डिड़ई शिवनगर में रविवार को भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासन, देशभक्ति और संगठन की एकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। पथ संचलन का दृश्य देखते ही बनता था – जहां एक ओर स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियाँ सड़कों पर आगे बढ़ रहीं थीं, वहीं दूसरी ओर देशभक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।कार्यक्रम का शुभारंभ स्थानीय एक कॉलेज परिसर से हुआ। पथ संचलन निर्धारित मार्गों-मसिना मोड़ होते हुए पुनः कॉलेज गेट पर आकर सम्पन्न हुआ। पूरे मार्ग पर नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में राष्ट्रीय उत्साह व गर्व का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।मुख्य वक्ता अवनीश (जिला प्रचारक) ने संघ के उद्देश्यों पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य एक सशक्त, संगठित और चरित्रवान भारत का निर्माण करना है।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संघ के कार्यों से जुड़कर समाज सेवा एवं राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक अनुशासन, सेवा और समर्पण का प्रतीक है। इसी भावना से समाज और राष्ट्र की शक्ति का विस्तार संभव है। कार्यक्रम का संचालन जिला प्रचारक बांसी अवनीश जी ने किया, जबकि राजू नयन ने संघ की परंपरा, मर्यादा और अनुशासन के महत्व पर प्रेरक विचार रखे।इस दौरान संघ गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया। उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में दीपेन्द्र विक्रम सिंह उर्फ दीपू, रमेश धर द्विवेदी, दशरथ चौधरी, रामचन्द्र चौधरी, राम अजोरे चौधरी, बृजेश चौधरी अखलेश शर्मा, दिलीप तिवारी, ज्ञानेंद्र मिश्रा, भीम मिश्रा, सतीश चौधरी, राजेश मिश्रा, सुरेन्द्र चौधरी, दिनेश सिंह, अनिल सिंह, महेश मिश्रा, महेश पाण्डे, अवधेश पाण्डेय, सुरेन्द्र सिहं, सजय सिंह, ध्रुव शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। पथ संचलन के दौरान नगर में राष्ट्रभक्ति की ऐसी लहर उमड़ी कि गलियों से लेकर छतों तक “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे। डिड़ई शिवनगर का वातावरण देशभक्ति और एकता के रंग में रंग गया।



