हिन्दी दिवस पर हुआ काव्य गोष्ठी का आयोजन

सिद्धार्थनगर। हिन्दी दिवस के पावन अवसर पर ’राष्ट्रीय कवि संगम’ सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में कवि डा0 सुशील श्रीवास्तव सागर के आवास कॉव्यकुंज श्रीवास्तव कालोनी बॉंसी – सिद्धार्थनगर पर काव्य गोष्ठी आयोजित हुयी जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डा0 ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक ने की और संचालन डा0 सुशील श्रीवास्तव सागर ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ नागरिक राम सरन लाल श्रीवास्तव उपस्थित रहे। कार्यक्रम में हिन्दी की महत्ता और उपयोगिता पर चिंतन और विचार किया गया।तत्पश्चात कवियों ने अपनी रचना के माध्यम से सभी को भाव विभोर कर दिया। डा0 सुशील श्रीवास्तव सागर ने वांणी वंदना के पश्चात गीत ’हिन्दी है जन जन की भाषा हिन्दी है पहचान, हम सब हिन्दी भाषी हैं हम सबको है अभिमान।’ पढ़कर कार्यक्रम को दिशा प्रदान की जिसे ख़ूब सराहना मिली। तत्पश्चात वरिष्ठ कवि ब्रम्ह देव शास्त्री पंकज की रचना ’जिस हिंदी ने अपना परचम दुनिया में लहराया है, उस हिंदी को अपने घर में मान नहीं मिल पाया है।’ पढ़ी और ख़ूब तालियां बटोरी। फिर कवि कृष्ण कुमार मिश्र किशन ने ’पृष्ठ पर हिंदी सजेगी बूंद मसि का भार दो, है सरल लिखना इसे बस लेखनी में धार दो।’ पढ़कर माहौल को ख़ुशनुमा बनाया। कवि कुंज बिहारी कुंज ने अपनी रचना ’हिंदी में देश एवं ब्रम्हांड के सभी देवी देवताओं के नाम हैं, अन्तर मन से सोचिए कि अन्य भाषाओं का भारत में क्या काम है।’ पढ़कर सोचने को विवश किया। कवि किशन जी वर्मा किशन ने ’मौन ही मौन से बोलता रह गया दिल से अपना पता पूछता रह गया, तुमसे मैं जब मिला मिलके हम हो गया, ख़ुद ही ख़ुद में ख़ुदा ढूंढ़ता रह गया।’ पढ़कर आध्यात्मिक वातावरण उत्पन्न किया। देर रात तक चले कार्यक्रम में बाल जी श्रीवास्तव, भोला सिंह, दीप नरायन पाण्डेय दीप राम सरन श्रीवास्तव, दिनकर त्रिपाठी, सचिन, सुवर्णना श्रीवास्तवा, डा0 अमिता श्रीवास्तवा, श्रीमती त्रिभावती श्रीवास्तवा, श्रीमती अरूणा मिश्रा सहित जागरूक नागरिकों की उपस्थिति प्रासंगिक रही।




