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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

कठेला थाना से 300 मी0 दूरी पर चोरों द्वारा जानलेवा हमला

कठेला/सिद्धार्थनगर। बदमाशों द्वारा इतना निडर होकर घटना को अंजाम देना और पुलिस थाना के करीब बात कुछ सन्देहास्पद सी प्रतीत होती है। विगत दिवस दिन में 10 बजे एक युवती को चाकू दिखाकर छिनैती करना, वह भी कठेला समयमाता थाना से मात्र 1.5 किमी की दूरी पर हुआ था। सीसीटीवी कैमरे में चोर कैद भी हुए थे लेकिन अभी तक पकड़ से बाहर हैं। कठेला गर्वी के कठेला चौराहे पर चोरों ने ऐसा आतंक मचाया कि हर कोई भयभीत हो गया। प्राप्त सूचना के मुताबिक अंग्रेज पुत्र शेर अली मुंशी निवासी कठेला गर्वी कठेला चौराहे से कठेला बाजार/पुराना बैंक मार्ग, जिस पर कुछ पुलिसकर्मियों का आवास भी है, में जाने वाले रास्ते पर रात में लगभग 12 बजे चोर छत पर चढ़ गये थे। छत से जब अंग्रेज के घर के पीछे कूदने की आवाज आई तो अंग्रेज को कुछ शंका हुआ कि कोई व्यक्ति उनके घर के पीछे है। तभी अंग्रेज के द्वारा दरवाजा खोला गया तो एक चोर के द्वारा गर्दन पर चाकू से हमला कर दिया गया। अंग्रेज द्वारा गर्दन हटा लिया गया, जिसके बाद हाथ में चाकू लग गया। वहीं 2 चोरों द्वारा हमला दोबारा से करने के लिए कहा गया। अंग्रेज द्वारा बताया कि हमें तीन चोर दिखाई पड़े थे और चोरों की बातचीत से लगा कि चोर बिहारी थे। अनेकों घटित घटनाओं में पहनावा, चाल ढाल, बातचीत से एक तथ्य पता चलता है कि चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले बिहारी हैं। अब सवाल यह है कि इन्हें सटीक जानकारी कहां से प्राप्त हो रही है। फेरी करके गांवों की रेकी की जाती थी, लेकिन इस समय वह भी नहीं हो रहा है और मजदूरी करनें के बहाने रेकी कि जाती थी, वह भी बन्द है और पूरे जनपद में आतंक व्याप्त है, तो ऐसे अन्धेरे में तो चोरी करनें नहीं आते होंगे। पीड़ित अंग्रेज द्वारा शिकायत थाना कठेला समय माता पर दिया गया है। कठेला थाना पुलिस द्वारा दिन में कठेला चौराहे पर सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया, जबकि घटनाएं रात्रि में घटती है, तब पुलिस का अता पता नहीं रहता। थाना के समीप घटित हो रही घटनाएं को लेकर पुलिस की रात्रि गश्त की पोल खोल रही है। एक के बाद एक गम्भीर घटनाओं के घटित होने के बावजूद सम्बन्ध बीट पुलिस, हल्का दरोगा और अन्य जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से ही विभाग निष्क्रिय हुआ है। जनता जागती है और जिम्मेदार चौन से सोते हैं। जब थाना के समीप के लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो सुदूर के लोगों का जीवन अधर में रतजगा करना ही एक मात्र विकल्प बचा है।

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