कम बारिश से खतरे में धान की फसल, डीजल इंजन से सिंचाई कर बचाने की कोशिश में जुटे किसान

इटवा/सिद्धार्थनगर। विकास क्षेत्र इटवा में इस वर्ष मानसून की सक्रियता कम रहने से औसत से 36 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। धान की फसल को इस समय पानी की अत्यधिक आवश्यकता है। वर्षा की कमी से फसल की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। क्षेत्र में बीच-बीच में हल्की वर्षा हुई, लेकिन उसके बाद मौसम शुष्क हो जाता है। तेज धूप भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। कृषि तकनीकी सहायक राम बहादुर इटवा के मुताबिक वर्षा की कमी से धान का उत्पादन प्रभावित होगा। चौखड़िया, डबरा, परसा, संग्रामपुर और सेमरी के किसान अब्दुल रहीम, खालिक, मो0 रफीक, धर्मपाल चौधरी, राम कृष्ण यादव, राजकुमार, सत्यनारायण और रामसागर ने बताया कि उन्होंने पूंजी लगाकर धान की रोपाई और खाद-दवा की व्यवस्था की। क्षेत्र में नहरों का जाल नहीं होने से किसान डीजल इंजन लगाकर सिंचाई कर रहे हैं। वर्षा की कमी से कीटों में भी वृद्धि हो रही है। नमी की कमी से उर्वरकों के प्रयोग में भी समस्या आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे भी वर्षा नहीं हुई तो धान की फसल का विकास रुक सकता है और उत्पादन में कमी आ सकती है।




