गनवरिया के नष्ट होते कुएं: डॉ. शरदेन्दु कुमार त्रिपाठी

सिद्धार्थ नगर। लगभग एक वर्ष पूर्व कपिलवस्तु परिक्षेत्र के अंतर्गत विश्व विख्यात गनवरिया पुरास्थल के समीप एक प्राचीन कुआं प्रकाश में आया था। इसके प्राथमिक सर्वेक्षण से मेरा यह निष्कर्ष था यह एक आवासीय संरचना का भाग है, जो गनवरिया के पुरावशेषों का अभिन्न अंग हो सकता है। जैसा कि यह विदित है कि गनवरिया के उत्खनन से प्राप्त विभिन्न संघारामों के आँगन में एक- एक कुएं अवश्य प्राप्त हुए हैंद्य इस आधार पर यह संभव है कि गनवरिया के पुरास्थल कि चाहर दिवारी के बाहर लगभग 40 मीटर कि दूरी पर मिला यह कुआं किसी संघाराम के मध्य में स्थित हो। जब यह कुआ प्राप्त हुआ था तब मेरे सर्वेक्षणों को आधार बना कर समाचार पत्रों ने इस कुएं के संरक्षण हेतु अभियान चला के ख़बरें प्रकाशित की थीं लेकिन इस कुएं को सुरक्षित नहीं किया जा सका द्य इसका परिणाम यह हुआ है कि अब यह प्राचीन कुआं नष्ट होने कि कगार पर पहुँच गया है। इस बार जब मै और मेरा शोधछात्र सुधांशु सिंह इसे पुनः देखने पहुचे तो इसकी ईंटे क्षतिग्रस्त मिलीं। टूटी हुई ईंटों कि सामग्री न केवल उसके बनावट अपितु प्राचीनता कि कहानी भी कह रहीं है। यह हो सकता है कि आने वाले दिनों में प्राचीन इतिहास का मूक गवाह यह कुआं अपना अस्तित्वा खो बैठे द्य और यदि ऐसा होता है तो सिद्धार्थनगर के इतिहास का यह काला पृष्ठ होगा। अतः आज इस कुएं के संरक्षण कि तत्काल आवश्यकता है।




