**वीरता और शहादत को नमन: चहलारी नरेश वीर बलभद्र सिंह के 168वें शौर्य दिवस पर जन सत्याग्रह का संकल्प**

**बहराइच। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) के महान योद्धा और अमर सेनानी चहलारी नरेश वीर बलभद्र सिंह के 168वें शौर्य दिवस पर आज चहलारी घाट पर एक भव्य और भावुक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कांग्रेस नेता विनय सिंह की अगुवाई में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय **”आओ महान बलिदानी से प्रेरणा लें”** था।
इस अवसर पर उपस्थित क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों और युवाओं ने सामूहिक रूप से शहीद बलभद्र सिंह जी को सैल्यूट देकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही, राष्ट्रभक्ति की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए लोगों ने अपनी हथेलियों पर चहलारी घाट का पवित्र जल और मिट्टी लेकर एक बड़े जन आंदोलन का संकल्प लिया।
**रेलवे स्टेशन और रेल मार्ग विस्तार के लिए जन सत्याग्रह का शंखनाद**
कार्यक्रम में मौजूद जनसमूह ने संकल्प लिया कि अमर शहीद की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए एक बड़ा जन सत्याग्रह चलाया जाएगा। इस आंदोलन की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
**चहलारी नरेश रेलवे स्टेशन:** उक्त ऐतिहासिक स्थल पर चहलारी नरेश वीर बलभद्र सिंह जी के नाम से एक नए रेलवे स्टेशन का निर्माण किया जाए।
**रेल मार्ग का विस्तार:** बहराइच से विसवां होते हुए प्रमुख रेल मार्ग को सीतापुर तक जोड़ा जाए।
**शहीद स्मृति स्थल तक जुड़ाव:** इस रेल मार्ग का विस्तार बाराबंकी स्थित उनके शहीद स्मृति स्थल ‘ओबरी’ तक किया जाए।
**’सर कटने के बाद भी अंग्रेजों से लड़ते रहे वीर बलभद्र’**
शहीद को नमन करते हुए कांग्रेस नेता विनय सिंह ने उनके अदम्य साहस की गाथा साझा की। उन्होंने बताया कि:
“अवध के महान सेनापति चहलारी नरेश बलभद्र सिंह ने आज ही के दिन **13 जून 1858 ई.** को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आर-पार का संघर्ष करते हुए वीरगति प्राप्त की थी। इतिहास गवाह है कि उनका शौर्य ऐसा था कि सर कटने के बाद भी वे कई घंटों तक अंग्रेजों से लोहा लेते रहे। अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले इस महान योद्धा की उम्र वीरगति के समय मात्र **18 वर्ष और 3 दिन** थी।”
**देश के युवाओं के लिए चिरंजीवी आदर्श**
विनय सिंह ने आगे कहा कि वीर शिरोमणि बलभद्र सिंह समस्त देशवासियों और विशेषकर आज के नवयुवकों के लिए एक चिरंजीवी आदर्श हैं। वह अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता संग्राम में कूदने वाले निष्काम कर्मयोगी थे। अवध की धरती के इस लाडले लाल का स्थान भारतीय वीरों के इतिहास में ठीक वैसा ही है, जैसा महाभारत में अभिमन्यु का था। इतिहास के पन्नों में उनका यह सर्वोच्च बलिदान हमेशा अजर और अमर रहेगा।
इस शौर्य दिवस कार्यक्रम में भारी संख्या में स्थानीय लोग, युवा और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने देश की माटी की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले महानायक को नम आंखों से याद किया।



