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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

जनपद सिद्धार्थनगर में दो दिवसीय सांसद खेल महोत्सव हुआ सम्पन्न

सांसद जगदम्बिका पाल ने खिलाड़ियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर की धरती पर खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है।

सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर में 26 और 27 नवम्बर को आयोजित सांसद खेल महोत्सव खेल ऊर्जा, अनुशासन और प्रतिभा का भव्य संगम बनकर उभरा है। 26 नवम्बर को बर्डपुर, डुमरियागंज, इटवा समेत सभी विकास खण्डों में एक साथ शुभारम्भ हुआ और माहौल खेलमय हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर कस्बों तक हजारों प्रतिभागियों ने कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, कुश्ती और दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्थानीय प्रतिभा की ताकत का परिचय दिया। ग्रामीण स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं ने इस बार स्पष्ट कर दिया कि सिद्धार्थनगर के गांवों में खेल को लेकर गहरी रुचि और अपार संभावनायें मौजूद हैं। माता-पिता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और युवाओं की भारी भीड़ ने खिलाड़ियों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।27 नवम्बर गुरुवार को जिला खेल स्टेडियम में सांसद जगदम्बिका पाल ने महोत्सव का औपचारिक समापन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य है कि पूरे देश में खेल ऊर्जा को बढ़ावा दिया जायें, ताकि गांवों और छोटे इलाकों से खेलने वाले बच्चे जिला, मण्डल, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर देश का नाम रोशन करें। सांसद जगदम्बिका पाल ने खिलाड़ियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर की धरती पर खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आने वाले वर्षों में सांसद खेल महोत्सव को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जायेगा, ताकि अधिक से अधिक खिलाड़ियों को अवसर मिल सके। सांसद खेल महोत्सव समापन समारोह में जिले के डीडीओ सतीश कुमार सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष सदर गोविन्द माधव, रिंकू पाल, रजनीश सिंह, मनोज बाबा, जहीर खान, दिलीप सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे। स्टेडियम तालियों से गूंज उठा जब विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। सांसद खेल महोत्सव ने सिद्धार्थनगर के युवाओं में खेल के प्रति सकारात्मकता और अनुशासन को नई दिशा दी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि जिले में इसी प्रकार नियमित आयोजन होते रहें, तो सिद्धार्थनगर से राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी निकल सकते हैं। दो दिनों तक चले इस आयोजन ने सिद्धार्थनगर में खेल संस्कृति को नई उड़ान दी। गांवों से आये खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि उन्हें अवसर मिले तो वह किसी भी बड़े मंच पर अपना कौशल दिखा सकते हैं।

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