भारत-नेपाल बॉर्डर बढ़नी कस्टम से पास नेपाली टूरिस्ट बस को एसएसबी ने वापस लौटाया
महिलाओं, वृद्धों एवं बच्चों से भरी बस नोमेंस लैंड पर खड़ी होने को विवश, मानवीय संवेदनाओं पर भारी निर्देश

बढ़नी/सिद्धार्थनगर। टूरिस्टों को लेकर काठमाण्डू से दिल्ली जा रही नेपाली बस को बढ़नी बॉर्डर पर तैनात एसएसबी 50वीं वाहिनी के बढ़नी बीओपी अधिकारियों ने सुरक्षा एवं उच्चाधिकारियों के आदेश का हवाला देते हुए भारतीय क्षेत्र से लौटा दिया। करीब 45 टूरिस्टों से भरी बस को रात्रि में नो-मेन्स लैण्ड पर खड़ा होना पड़ा, जिससे उनमें क्षोभ देखा गया। मंगलवार रात्रि करीब साढ़े 9 बजे काठमाण्डू से टूरिस्टों को लेकर आई बस सिद्धार्थनगर के बढ़नी बॉर्डर पर पहुंची, जिसमें कई महिलाएं, बच्चे तथा वरिष्ठ नागरिक रहें। उक्त बस को कस्टम ने अपनी औपचारिकता, चेकिंग करने के बाद पास कर दिया। बस जब एसएसबी चेक पोस्ट की ओर बढ़ी तो जवानों ने उसे रोक दिया। काफी हिल्ला हवाली के बाद मौके पर एसडीएम शोहरतगढ़ विवेकानन्द पाण्डेय एवं क्षेत्राधिकारी शोहरतगढ़ पवीन प्रकाश मौके पर पहुंचे तो एसएसबी बढ़नी बीओपी प्रभारी असिस्टेन्ट कमांडेन्ट संजय केपी ने बताया कि उन्हें नेपाल से वाहन या नेपाली नागरिकों को प्रवेश नहीं देने का आदेश मिला है, जबकि बढ़नी कस्टम के सुपरिटेण्डेन्ट आरजी राम ने बताया कि उन्हें सतर्कता बरतने का निर्देश है, किसी को रोकने का नहीं, इसलिए गाड़ी की प्रक्रिया को पूरी कर पास किया गया। लोगों ने एसएसबी अधिकारियों को समझाया कि सभी की चेकिंग, जांच करके जाने दिया जायें, क्योंकि वो लोग किसी तरह आन्दोलित क्षेत्रों से बचते हुए बॉर्डर तक आ गये हैं, जिनमें वृद्ध और बच्चे भी हैं लेकिन उन्होंने एक न सुनी। कस्टम एवं एसएसबी के बीच पिस रहे नेपाली टूरिस्टों को पुनः नेपाल भेजने की बात कह मौके से एसडीएम एवं सीओ चलता बने। करीब सवा 11 बजे बढ़नी कस्टम ने बैरियर खोल दिया और बस व टूरिस्टों को नेपाल की तरफ बैक हो जाना पड़ा। उधर तकनीकी कारणों से नेपाल ने भी बस को वापस लेने से इनकार कर दिया। महिलाओं, वृद्धों एवं बच्चों से भरी उक्त बस को नो-मेन्स लैण्ड पर ही रात्रि में खड़ा होना पड़ा। स्थानीय लोगों ने एसएसबी के हठवादी रवैये को अमानवीय भी करार देते हुए कहा कि आखिर टूरिस्टों की खता क्या है? कोई भी आदेश, निर्देश जनता की सुविधा, सहजता के लिए ही बनता है। मौके पर एसओ ढेबरुआ नारायण लाल श्रीवास्तव, चौकी इंचार्ज बढ़नी अनिरुद्ध सिंह जमे रहे।




