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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

एक बार फिर प्रशासन पर फिर गरजे विधायक, आखिर उन्हें बार-बार क्यों आता है गुस्सा

सिद्धार्थनगर। विधानसभा 302 शोहरतगढ़ के विधायक विनय वर्मा इस बार गुस्से में हैं। बीते दिन समीक्षा बैठक में खुद को न बुलाये जाने के विरोध स्वरूप वे कलेक्ट्रेट परिसर स्थित बैठक में न बुलाने के वावजूद पहुंच गये और खुद फेसबुक पर लाइव आकर जिलाधिकारी से न बुलाने का कारण पूछने लगे। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे सरकार के सहयोगी दल के विधायक हैं। अपने क्षेत्र में सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करते हैं। इसके बावजूद भी जिला स्तरीय अधिकारी उनकी बार-बार अनदेखी करते है। गत दिनों बढ़नी ब्लाक में डीडीओ सतीश सिंह की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भी उन्हें नहीं बुलाया गया। उन्होंने धमकी भरे स्वरों में कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में उन्हें न बुलाए जाने की शिकायत वह मुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष से शीघ्र मिलकर करेंगे। जरूरी हुआ तो इस मसले को विशेषाधिकार हनन के तहत भी उठायेंगे। अपना दल (एस) के विधायक विनय वर्मा की नाराजगी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी उन्होनें प्रशासन पर अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया है। इस बारें में कई जानकारों का कहना है कि दरअसल बैठकों में विधायक विनय वर्मा प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर बहुत तीखा हमला करते हैं। जिससे अधिकारी कई बार असहज हो जाते हैं। इससे पूर्व एक कलेक्टर को वह बैठक में काफी कुछ कह चुके हैं। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कई बार कर्मचारियों पर खुला आरोप लगा चुके हैं। प्रशासन के सूत्रों के अनुसार ऐसे में विधायक को बैठकों में न बुलाना ही बेहतर है। आरोप है कि विधायक सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए अपने तेवर उग्रकर लेते हैं। इस बारें में विनय वर्मा के समर्थकों का कहना है कि विधायक जी यदि जनहित के मुद्दों को बैठकों में उठाते हैं तो इसमें गलत क्या है। वे बैठकों में अगर भ्रष्ट कर्मियों के खिलाफ बोलते हैं तो यह बुरा कैसे है। वास्तव में उनके जनहित के सवालों से परेशान लाग ही उनकों बैठकों की सूचना न देने का षडयन्त्र करते हैं। बैठकों में विधायक को न बुलाना उनके विशेषाधिकार का हनन है। इसे अब सहन नहीं किया जायेगा। आपको बता दें कि गैर भाजपाई दलों के विधायक/विधान परिषद सदस्य आम तौर पर आरोप लगाते हैं कि प्रशासन भाजपा छोड़ अन्य दलों के विधायकों को अहमियत नहीं दे रहा है। पिछले दिनों शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने भी अपनी उपेक्षा का आरोप सार्वजनिक तौर पर लगाया था। माता प्रसाद पाण्डेय जो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, वे भी जिला प्रशासन पर इसी तरह का आरोप लगाते हैं। सवाल है कि यह सब विधायक क्यों नाराज हैं?

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