वैचारिक क्रांति से ही संभव है सामाजिक परिवर्तन, श्रावस्ती में बौद्ध सम्मेलन सम्पन्न

श्रावस्ती। 12 अक्टूबर श्रावस्ती में आयोजित बौद्ध सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि वैचारिक क्रांति के बिना सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं है। वैचारिकी को साकार करने के लिए प्रयोग ही एकमात्र मार्ग है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अंगुलिमाल गुफा और जेतवन मूल गंध कुटी का दर्शन किया। राष्ट्रीय संगठक ए.के. नन्द ने इन स्थलों के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि बी.डी. संगम साहेब और रमेश बाबू बाघमारे ने गीतों के माध्यम से संदेश को रोचक रूप में प्रस्तुत किया। महिला सत्र की अध्यक्षता कमला रानी बौद्ध ने तथा संचालन जिया मौर्य ने किया। इस दौरान जिज्ञांसी बौद्ध और शिवांशी मौर्य ने गीतों द्वारा विषय को स्पष्ट किया। ए.के. नन्द ने कहा कि नारी सम्मान और अधिकारों की व्यवस्था बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने संविधान में दी है, पर इसे समाज को स्वयं साकार करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि बौद्ध पर्सनल लॉ बौद्ध समाज की स्वतंत्रता की आधारशिला है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान किया गया है। कार्यक्रम में घनश्याम प्रजापति, बी.डी. संगम, जगदीश प्रसाद, सुशील कुमार, अनूप कुमार गौतम, मनमोहन वर्मा और दया शंकर लाल मौर्य ने भी संबोधित किया। समापन अवसर पर सब्ब सुख गाथा का गायन किया गया और देश-विदेश से आए अतिथियों को अंग वस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया।




