अब नहीं होगी बारिश तो प्रभावित हो जायेगा उत्पादन

इटवा/सिद्धार्थनगर। मानसून कमजोर होने से इस बार औसत से भी कम वर्षा हुई। इसके चलते धान की फसल प्रभावित होने को आशंका बढ़ने लगी है। इस समय धान की फसल को पनी की नितान्त आवश्यकता है, यदि अब वर्षा नहीं हुई तो निश्चित ही उत्पादन पर असर पड़ जायेगा। बारिश न होने से कीटों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। इस बार जून से अब तक करायें 36 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। बीच-बीच बर्षा जरूर हुई, मगर फिर मौसम शुष्क हो जाता। इधर मौसम की बेरुखी लगातार सूनी हुई हैं। कई दिनों से अच्छी वर्षा का इंतजार किसान कर रहे हैं, पर उम्मीद पूरी नहीं हो रही है। बीच-बीच में तेज धूप भी परेशानी को वजह बनी है। इससे किसान चिन्तित है। क्या कहते हैं कृषि विज्ञानी कृषि विज्ञानी कु0वि0 केन्द्र, सोहना डा0 सर्वजीत ने बताया कि बारिश न होना धन की फसल के लिए हानिकारक है। खेत में पानी न होने पर तभी छेदक कीट को समस्या पड़ रही है। इनके प्रबन्धन के लिए कार्टपाइट्रो क्लोराइड 50 प्रतिशत, एसपी 30-35 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। इससे तन छेदक के साथ साथ पत्त्र लपेटक एवं अन्य कीटों का प्रबन्धन होता है। नमी न होने पर उर्वरकों के प्रयोग में परेशानी उत्पन्न हो रही है। हो सके तो उर्वरकों का घोल बना कर छिड़काव करें। खेत में रेड वर्म को समस्या होने पर क्लोरोप्लाइफोस 50 प्रतिशत, ईसी 400 एमएल का छिड़काव करना चहिए। किसान रामदीन विश्वकर्मा ने कहा कि इस बार मानसून की सक्रियता कम रही। शुरुआत में निजी संख्धन का सहारा लेना पड़ा। इन दिनों खेतों में पानी की बहुत जरूरत है। वहीं किसान राजित राम चौरसिया ने बताया कि वर्षा न होने से फसल का विकास नहीं हो पा रहा है तो कीटों की भी बढ़ोतरी हो रही है। यही स्थिति रही तो काफी नुकसान हो जायेगा। कृषक चिनकन वरुण ने कहा कि अब अगर वर्ष नहीं हुई तो फिर धान की फसल का विकास नहीं हो सकेगा, इसके चलते उत्पादन कम होने का खतरा बना जागा। तो वहीं किसान रज्जब अली ने बताया कि इस बार तो लग नहीं रहा है कि बरसात का मौसम चल रहा है। बीच-बीच में तेज धूप निकल आती है, जो फसल के लिए ठीक नहीं है।




