नगर पंचायत इटवा अनियमितताओं का अड्डा, मूलभूत सुविधाओं का टोटा

इटवा/सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर की नगर पंचायत इटवा इन दिनों ही नहीं, बल्कि जब से यह बनी है तब से लगातार सुर्खियों में है। इस नगर पंचायत में समस्याओं का अम्बार है, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ फाइलों में बातें बन्द हैं। कस्बे की गलियां आज भी जर्जर हालत में हैं। कई मोहल्लों में ना तो पक्की सड़कें हैं और ना ही जल निकासी की उचित व्यवस्था। नालियां या तो बनी ही नहीं, और जहां बनी हैं, वहां गन्दगी और जलजमाव का आलम है। नगर पंचायत में कार्यभार देखने वाले अधिशासी अधिकारी (ईओ) अक्सर बदलते रहते हैं। इसका असर विकास कार्यों की निरन्तरता और पारदर्शिता पर पड़ता है। नगर पंचायत इटवा में नियुक्त प्राइवेट सफाईकर्मियों और अन्य कर्मियों को महीनों से मानदेय भी टाइम से नहीं मिलता, लेकिन विभागीय अमला अनदेखी कर रहा है। आपको बता दें कि करीब 33 लाख रुपये खर्च कर जो कचरा घर बनाया गया, वह अब तक खाली पड़ा है। उल्टा, कस्बे में बीच बस्ती, नहर के किनारे और सड़कों पर कूड़ा खुलेआम डाला जा रहा है। इससे न सिर्फ गन्दगी फैल रही है, बल्कि बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। कस्बे में हुए कई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की भारी अनदेखी की गई है। कहीं सीमेन्ट की मात्रा कम, तो कहीं बालू और ईंट की मिलावट, सब कुछ सिर्फ खानापूर्ति के नाम पर। जांच हो तो करोड़ों की अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। वहीं डूडा (क्न्क्।) योजना के तहत जो कार्य कराये गये, उनमें से अधिकतर अधूरे पड़े हैं। जिनका काम हुआ भी, वह सतही और मानकविहीन रहा है। आवास, टॉयलेट, और अन्य योजनाएं केवल कागजों में ही पूरी दिख रही हैं। आपको बता दें कि इटवा नगर पंचायत को सुधार की सख्त जरूरत है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही ने इसे समस्याओं का गढ़ बना दिया है। यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाये गये, तो जनता का विश्वास प्रशासन से उठ जायेगा।



