सावधान! शार्ट कट में पैसा कमाना, कही मुसीबत ना बन जाए

खुनुवां/सिद्धार्थनगर। साइबर क्राइम को रोकने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है, लोग अब जागरूक भी हो रहें हैं। लेकिन साइबर अपराधी अब अपना रास्ता बदलने लगें हैं और पूरे देश में शार्ट कट में लाखों रुपए कमाने वाला आफिस खोलकर बेरोजगार लोगों को नौकरी देने के नाम पर फंसाकर बन्धक बना लेते हैं। जिससे जहां बेरोजगार युवक व युवतियों तो फंसते ही है, साथ में परिवार अपने बच्चों को छुड़ाने के चक्कर में लाखों गंवा देता है और किसी से कहता भी नहीं। ऐसा ही कुछ मामला शोहरतगढ क्षेत्र का प्रकाश में आया है। शोहरतगढ़ क्षेत्र के चोडार गांव से नौकरी के चक्कर में कानपुर शहर गया एक युवक ठगों के चक्कर में फस कर बन्धक जैसे घटना का शिकार हो गया। घर से पैसा मंगवाया फिर भी ठगों के चंगुल से नही छूट रहा था, लेकिन जब बात सामने आयी तो कुछ समाजसेवियों के सूझबूझ से ठगों के चंगुल से निकल कर अपने गांव आ कर लोगों को आपबीती सुनायीं। क्षेत्र के इसी गांव का एक युवक बनारस से भाग कर आया। क्षेत्र के नडौरा, लुचुइया, चिल्हिया, दत्तपुर, नियांव गांव के युवाओं ने ऐसे ही गिरोहों के चंगुल से छूटकर कर घर आने पर लोगों से जो बताया वो सुनकर सब दंग हो गये। बनारस से भाग कर आया एक युवक ने बताया कि पहले ये लोग मोबाइल नंबर पर फोन कर के एक अच्छी नौकरी देने के नाम पर अपनें पते पर बुलाते हैं, फिर ट्रेनिंग देने के नाम पर दूसरे जगह खाली मकान या बिल्डिंग में शिफ्ट करते हैं। जहां सीसीटीवी कैमरे के निगरानी रहने के साथ इनका निजी सिक्योरिटी गार्ड होता है जों किसी को बाहर नहीं निकलने देता। फिर ये लोग खेला शुरू करते हैं। सबसे पहले सभी से कहते हैं कि अपनें बेरोजगार मित्र, रिस्तेदारो कों बुलाओ कि हम अच्छी नौकरी करते हैं। यहां आ जायें तो उनका सेलरी के रूप में 22 हजार रुपए महीना मिलेगा। फिर घर वालों से पैसा मंगवाते हैं कि ट्रेनिंग का फीस देना है खाना, पानी, कमरें का किराया फिर जब तक लड़कों के परिवार से पैसा नही आता तब तक फोन करवातें रहते हैं। अपनें सामने ही फोन करवातें है जिससे इनका राज ना खुलें फिर फोन कों अपनें कस्टड़ी में कर लेते हैं। जब एक लड़कों के घरवालें पचासों हजार भेज कर तंग हो जातें हैं तो कहते हैं। ऐसा काम छोड़कर घर वापस आ जाओ तो वहां का मैनेजर आने नहीं देता। कहता कि अपनें जगह पर दो लोगों को बुलावों फिर जानें देंगे। जहां पर रखतें हैं वहां का पता भी नहीं बताते। जब भी मकान या ट्रेनिंग सेंटर पर कोई खतरा का एहसास होता तो रातों रात बन्द गाड़ी से दूसरे जगह लड़कों को शिफ्ट कर दिया जाता। वहां से बाहर जाना या दूसरे से बात करना एलाउड नहीं होता। प्राप्त जानकारी के अनुसार इनका आफिस हर शहर में हैं और ये सरकार से पंजीकृत भी होते हैं। फिर ये लोग बेरोजगारो कों लिखा पढ़ी के दौरान एग्रीमेंट करते हैं और फिर पैसा कैसे कमाया जाय या प्रशानालिटी डबलपमेन्ट का ट्रेनिंग देते हैं। ट्रेनिंग में जैसे साइक्लोजी, सोच, मौका, पैसा के बारें में गहराई से जानकारी देते हैं कि नियम क़ायदा कानून के दायरे में रहकर पैसा कैसे कमाया जाता है। अपने बचाव का पूरा हथकंडा अपना कर कुछ और खेला करते हैं। खैर सभी लोग ऐसे नहीं है लेकिन ज्यादातर लोग ऐसे ही है जो शार्ट कट में पैसा कमाने के नाम पर लोगों को फंसाते हैं फिर उन्हें कंगाल करके शार्टकट में अपनें लाखों कमा लेते हैं। ये जांच का विषय है, अगर पुलिस चाहें तो शहरों में ऐसे जगहों यानी ट्रेनिंग सेंटर को चिन्हित कर छापेमारी कर लोगों से पूछताछ करे तो मामला खुल कर सामने आ जायेगा। क्योकि कुछ लोग ऐसे फंसे हैं जो अपनें परिवार, मित्रों, अफसरों, किसी को भी कुछ बतानें से शर्म महसूस कर रहे हैं या फिर उनके ऊपर किसी का दबाव रहता है।जिससे गांव व शहर के ऐसे जाल में फंसे हुए नौजवान आजाद हो जायेंगे। क्षेत्र के लोगों के साथ बेरोजगार युवकों, युवतियों को भी जागरूक होना चाहिए कि बाहर जानें से पहले ऐसे लोगों के बारे में सहीं जानकारी निकलने के बाद ही जाना चाहिए। पैसा कमाने के लिए मेहनत करना पड़ता है। अगर कोई बगैर मेहनत के पैसा देने का लालच देता है तो समझिए कि आप को फंसाकर कोई गलत काम करवायेगा, जिससे आप अपनें फंसेंगे फिर दूसरे को भी फंसायेंगे। शासन-प्रशासन को चाहिए कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर कार्यवाही करें अगर देखा जाए तो हर क्षेत्र से कोई ना कोई इस धन्धे में फंसा है, जिसे बाहर निकालनें की जरूरत है।




