लाखों की लागत से बना सामुदायिक शौचालय बदहाल, बाहर से डेंट-पेंट, अंदर टूटा फर्श, गायब सीटें और दरवाजे जिम्मेदार अधिकारी बने अनजान

इटवा/सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए सरकार लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जनपद सिद्धार्थनगर के विकासखंड खुनियांव के ग्राम पंचायत कनकटी में बना सामुदायिक शौचालय इस योजना की सच्चाई उजागर कर रहा है। शौचालय की दीवारें बाहर से तो ताजा पेंट कर चमकाई गई हैं, लेकिन अंदर फर्श उखड़ा हुआ है, टॉयलेट सीटें और दरवाजे गायब हैं, छत से प्लास्टर झड़ रहा है और अंदर गंदगी का अंबार लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के समय ही घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था, जिसके चलते शौचालय कुछ ही महीनों में जर्जर हो गया। सरकार ने गांव को स्वच्छ बनाने का सपना दिखाया, लेकिन यहां सिर्फ पैसा बहाया गया, सुविधा नहीं मिली। शौचालय आज तक उपयोग में नहीं आया। प्रशासन को कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब इस पूरे मामले पर एडीओ पंचायत आशुतोष मिश्रा से सवाल किया गया तो उनका कहना था अगर ऐसा है तो जांच करवाता हूं। उनके इस बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि विभागीय अधिकारी या तो वास्तविक स्थिति से अनजान हैं या जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शौचालयों का निर्माण सिर्फ कागजों पर पूर्ण दिखाने के लिए किया गया। सरकार की योजना का पैसा अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब में जा रहा है, जबकि गांवों में शौचालय ताले में बंद या पूरी तरह खंडहर बन चुके हैं। अब सवाल उठता है कि जब सरकार करोड़ों रुपए स्वच्छ भारत मिशन में खर्च कर रही है, तो ऐसे घटिया निर्माण और लापरवाही के जिम्मेदार कौन हैं? क्या केवल जांच करवाने के बयान से जिम्मेदारी पूरी हो जाती है? गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन की बर्बादी पर अंकुश लगाया जा सके और गांव के लोग वास्तव में स्वच्छ भारत मिशन का लाभ उठा सकें।




