बहनों ने मनाया भैया दूज, भाइयों के दीर्घायु की कामना की

डुमरियागंज/सिद्धार्थनगर। बहन-भाई के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक भैया दूज का पर्व गुरुवार को नगर और ग्रामीण अंचलों में हर्षाेल्लास के साथ पारंपरिक रीति से मनाया गया। सुबह से ही महिलाओं में उत्साह का माहौल रहा। बहनों ने गाय के गोबर से तरह-तरह की आकृतियां बनाकर गोधन कूटने की रस्म निभाई और भगवान से भाइयों की लंबी उम्र व रक्षा की प्रार्थना की। भाइयों के आगमन पर बहनों ने तिलक लगाकर आरती उतारी और यम द्वार कूटते हुए उनके दीर्घायु होने की कामना की। इस अनोखी परंपरा के तहत बहनों ने पहले भाइयों को प्रतीकात्मक रूप से मृत्यु का श्राप दिया, फिर अपनी जीभ में कांटा चुभाकर प्रायश्चित किया और उसके बाद गोधन कूटकर यमराज से भाई की आयु वृद्धि की प्रार्थना की। पूजा-पाठ के बाद भाइयों ने भी प्रेमपूर्वक अपनी बहनों को उपहार भेंट किए। बहनों ने दिनभर उपवास रखकर यमराज और यमुना जी की पूजा-अर्चना की। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भैया दूज पर बहन द्वारा पूजा किए जाने से भाई को यम के भय से मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। रामलीला मैदान स्थित शिव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राकेश शास्त्री ने बताया कि भैया दूज की परंपरा यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार, यमराज एक बार अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे, जहां यमुना ने प्रेमपूर्वक उनका सत्कार किया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक और पूजन कराएगा, उसे यम के भय से मुक्ति मिलेगी। तभी से यह पर्व यम द्वितीया के रूप में मनाया जाने लगा।
गाय के गोबर से तरह-तरह की आकृति बनाकर सबसे पहले पूजा-पाठ और हवन किया जाता है। उसके बाद कांटे को जीभ में चुभाकर भाइयों को प्रतीकात्मक रूप से श्राप दिया जाता है, फिर उन्हें पुनः जीवित करने के लिए यमराज की पूजा की जाती है। पंडित राकेश शास्त्री, मुख्य पुजारी, शिव मंदिर, रामलीला मैदान।



