कोर्ट के निर्णय से शिक्षक आहत, नहीं मनायेंगे शिक्षक दिवस

सिद्धार्थनगर। सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पूर्व से नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीइटी अनिवार्य किए जाने से आहत शिक्षकों ने शुक्रवार को शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों दूरी बनाने का निर्णय लिया है़। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान की जानकारी देते हुए उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने बताया कि सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश से देश भर में 10 लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। यदि आदेश को निजी स्कूलों पर लागू किया गया तो इससे प्रभावित शिक्षकों की सम्भावित संख्या करोड़ में होगी। ऐसे में शिक्षक समाज दुःखी एवं चिन्तित है। कहा कि हमेशा की तरह पांच सितम्बर को देश एवं सभी प्रदेश की सरकारें मंच सजाकर चंद शिक्षकों को चंद लम्हों का सम्मान देंगी। उनमें कई ऐसे शिक्षक भी होंगे जिन्हें भारत सरकार द्वारा बनाये गये कानून के कारण दो साल बाद सेवा से निकालने की चिंता सता रही होगी। ऐसे विषम परिस्थिति में मिलने वाले उस सम्मान को शिक्षक मन से कैसे स्वीकार कर पाएगा। भारत सरकार द्वारा टीइटी को लेकर बनाये गये कानून के क्रम में सुप्रीमकोर्ट द्वारा दिए गये निर्णय से देश भर के दस लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों के सामने दो वर्ष बाद सेवा से बाहर किए जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से मांग किया गया कि शिक्षकों के साथ न्याय करने की घोषणा करें। यही घोषणा ही शिक्षकों के लिए वास्तविक सम्मान होगा।




