मैं दरिया हूं मुझको बहना अच्छा लगता हैरू सीमा मिश्रा

सिद्धार्थनगर। जनपद के इंदिरा नगर में उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के तत्वावधान में एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ माता सरस्वती की वंदना से हुआ। बाल कवयित्री विदुषी वत्स ने माता सरस्वती की वाणी वंदना या कुंदेन्दु प्रस्तुत किया।शिवसागर शहर ने तरक्की तो उस घर की हो नहीं सकती, जहां बनती नहीं हरगिज जेठानी देवरानी में, प्रस्तुत कर लोगों को सोचने पर मजबूर किया। श्रृंगार रस में सुजीत जायसवाल ने ये तुम्हारी गली का सरल रास्ता, हमसे पूछो वह कठिन राह है, पढ़ा।विनय कांत मिश्र ने जग शंकर शंकर गाकर परिवेश को भक्तिमय बनाया। डॉ सीमा मिश्रा ने श्रृंगार रस की कविता मैं दरिया हूं मुझको बहना अच्छा लगता है, प्रस्तुत कर सृजनात्मक वातावरण का निर्माण किया। वरिष्ठ कवि नियाज़ कपिलवस्तुवी ने कल न होगा जो आज है साहब। यह पुराना रिवाज है साहब प्रस्तुत किया। ब्रह्मदेव शास्त्री पंकज ने प्रकृति सुंदरी की अनोखी छटा है, है मौसम सुहाना बसंती हवा है, पढ़ा। दिलीप कुमार द्विवेदी ने दिल न केहू क दुखावल जाला, पढ़ा। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ ज्ञानेंद्र द्विवेदी ने कोई सूरज नहीं मैं कि ढल जाऊंगा, चांद भी तो नहीं हूं कि बदल जाऊंगा पढ़कर वातावरण को ऊंचाई प्रदान की। विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष राम करन गुप्ता जी ने कहा कि इस तरह के काव्य आयोजन से साहित्यिक वातावरण की निर्मिति होती है। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी राणा प्रताप सिंह ने कहा कि कविता से जीवन को नवीन ऊर्जा प्रदान करती है।




