सीताराम विवाह धैर्य, समर्पण और प्रेम की पराकाष्ठा है – राजन जी महाराज

दैनिक बुद्ध का सदंेश
गोरखपुर। शहर के नौका विहार स्थित चंपा देवी पार्क में 27 जनवरी से चल रही राम कथा के पांचवें दिन धनुष भंग एवं सीतादृराम विवाह का भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया। विश्व विख्यात कथावाचक राजन जी ने कथा के माध्यम से धर्म, भक्ति और मर्यादा का गूढ़ संदेश दिया।राजन जी ने कहा कि जीवन में जितनी आवश्यकता अर्थ की है, उतनी ही परम अर्थ की भी है। परमार्थ का मिलना जीवन का सौभाग्य है। उन्होंने बताया कि असुरों से यज्ञ की रक्षा के बाद विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को मिथिला ले गए, जहां अनेक वीर राजाओं के असफल होने के पश्चात राम ने गुरु की आज्ञा से शिव धनुष को सहजता से उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाते ही उसका भंजन कर दिया। इससे सम्पूर्ण जनकपुर आनंद से भर उठा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल धनुष तोड़ना नहीं, बल्कि अहंकार का अंत और सच्चे समर्पण की विजय का प्रतीक है।धनुष भंग के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शक्ति का आधार भक्ति और विनम्रता है। लक्ष्मणदृपरशुराम संवाद के माध्यम से राम के धैर्य, तर्क और ब्राह्मण के प्रति सम्मान भाव को रेखांकित किया गया।सीतादृराम सहित चारों भाइयों के विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए राजन जी ने बताया कि इस दिव्य विवाह को देखने देवता भी वेश बदलकर आए थे। सुंदर भजनों के साथ विवाह प्रसंग सुनते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और स्वयं को जनकपुर का साक्षी अनुभव करने लगे।कथा में कुशीनगर विधायक पीएन पाठक, पिपराइच विधायक महेन्द्र पाल सिंह, डीआईजी गोरखपुर आनंद कुलकर्णी, उद्योगपति जगदीश आनंद, रमेश मिश्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। आयोजन में संयोजक प्रदीप शुक्ला तथा आयोजन समिति के सदस्यों की सहभागिता रही। हजारों श्रद्धालुओं ने कथा और भजनों का आनंद लिया।




