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उत्तर प्रदेशबलरामपुर

लाखों बाढ़ पीड़ितों को हाई कोर्ट ने दिया दिवाली पर बड़ा तोहफा

दैनिक बुद्ध का संदेश/राकेश श्रीवास्तव

बलरामपुर। बलरामपुर बाढ़ प्रभावित जनमानस को हाईकोर्ट ने दिवाली की पूर्व बड़ा तोहफा दिया तहसील तुलसीपुर के अंतर्गत भोजपुर शाहपुर के बीच बाराती नदी के एक किलोमीटर गैपिंग तक बंधु को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए गायत्री निर्माण पर चार सप्ताह में प्रगति आख्या रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ न्यायमूर्ति राजन राय तथा न्यायमूर्ति राजीव भारती के खंड पीठ द्वारा पत्रकार वीएस परिहार के जनहित याचिका 1087 ऑफ 2025 पर 17 अक्टूबर 2025 को आदेश पारित किया. जाटव बिहू की सैकड़ो गांव की जनमानस और फसलों को बाढ़ की त्रासदी से बचने के लिए वर्ष 2007 में सिंचाई विभाग सिद्धार्थनगर की बाढ़ खंड द्वारा राप्ती नदी के बाएं तट पर 102 किलोमीटर का तटबंध निर्माण कराया गया था लेकिन भोजपुर शाहपुर के बीच लगभग 1 किलोमीटर की गैपिंग छोड़ने से बरसात में एक नई राप्ती उद्गम होकर बहुत भारी बाढ़ की त्रासदी मचाती है वर्तमान में उक्त तत्व बंद की गैपिंग क्षेत्र बलरामपुर बाढ़ खंड डिवीजन के अंतर्गत आता है दीघा अवध के बावजूद भी बाढ़ खंड विभाग ने उक्त गैपिंग तटबंध को भरने का प्रयास नहीं किया फलता वर्षा काल में राप्ती का विपुल जल इसी गैपिंग तटबंध से उग्र रूप धारण कर किसानों की लाखों हेक्टेयर फसले बर्बाद कर जाती थी गांव के बाढ़ से गिर जाते हैं इस बाढ़ की भरा हुआ समस्या के निजात के लिए पत्रकार 20 परिहार ने विभाग को प्रार्थना पत्र दिया बाढ़ खंड विभाग ने जब इस लोक हित में कोई कारगर कदम नहीं उठाया तो श्री परिहार ने उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में एक जनहित याचिका आयोजित किया उक्त यशिका संख्या 1087 या 2025 पर डबल बेंच ने 17 अक्टूबर 2025 को प्रस्तुत सुनवाई करते हुए गंभीर रूप अपनाते हुए आदेश दिया की बाढ़ खंड सिंचाई विभाग उक्त गैपिंग बैंड निर्माण संबंधी करंट स्टेटस हाई कोर्ट के समक्ष 4 सप्ताह में अपनी आप प्रस्तुत करें हाई कोर्ट के गंभीर एवं साफ रूप को लेकर क्षेत्र वीडियो में हर्ष की लहर है नहीं संडे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में गागर में सागर भरकर दिवाली के पावन पर्व पर लाखों जनपद वाशिदो के भविष्य को नायाब तोहफा दिया है. याचिका की ओर से प्रस्तुत वरिष्ठ अधिवक्ता बालकृष्ण शुक्ला तथा सरकारी वकील पंकज गुप्ता के बीच घंटो बहस चली. माननीय उच्च न्यायालय ने दोनों अधिवक्ताओं को सुना और जनहित याचिका की बिंदुओं पर गंभीर और संवेदनशील रूप अपनाते हुए बाढ़ खंड विभाग को अधूरे तट बंध बनाने सख्त निर्देश दिया.
याचिका में आठ अधिकारी बनाए गए पार्टी
याचिका करता बी. एस. परिहार ने प्रमुख सचिव सिंचाई. सिंचाई भवन उदयगंज उत्तर प्रदेश शासन.मुख्य अभियंता गंडक नलकूप कॉलोनी गोरखपुर. आयुक्त देवीपाटन मंडल गोंडा. जिला अधिकारी बलरामपुर. अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बाढ़ आपदा बलरामपुर यूपी. उप जिला अधिकारी तहसील तुलसीपुर बलरामपुर. अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड बलरामपुर समेत ग्राम प्रधान वीरपुर कला को पार्टी बनाया
याचिका में उठाए गए 34 महत्वपूर्ण बिंदु
योजित जनहित याचिका में याचिका करता बी एस परिहार द्वारा इस गैपिंग तट बंद से संबंधित 34 महत्वपूर्ण बिंदुओं को याचिका में शामिल कर उठाया जिसमें प्रमुखता बाढ़ क्षेत्र से लाखों किसानों की फसले चौपट हो जाती हैं जिससे उनकी जीविकाएं प्रभावित होती हैं इसी क्रम में पानी की जल भराव के कारण यदि किसी व्यक्ति का मौत हो गई तो उसके दाह संस्कार करने के लिए कोई भी जमीन रिक्त नहीं रहती हैं इसी तरह कोई भी प्रसूता महिला प्रसव पीड़ा से प्रभावित होती है तो उसको ले जाने के लिए बाढ़ समय में कोई साधन नहीं मिलता है इसी तरह से एक महत्वपूर्ण बिंदु की क्षेत्र में बाढ़ से सारी फैसले बह जाने के कारण लोग जो बैंक के केसीसी के कर्जदार होते हैं वह समय से ब्याज भुगतान नहीं कर पाते हैं जिससे उनकी दुश्वारियां बढ़ जाती है बैंक कर्मी उन्हें परेशान करते हैं ऐसे ही एक ज्वलंत मुद्दा कि यहां जब बाढ़ में सारी फैसले नष्ट हो जाती हैं तो स आजीविका के लाले पड़ जाते हैं अंतत यहां के नौजवानों की शादियां नहीं हो पाती हैं लड़कियों के हाथ पीले नहीं हो पाते हैं आर्थिक विप्णता के कारण बच्चे पढ़ नहीं सकते हैं इनको फीस नहीं. इनके साथ साथ सकते हैं स्कूल बंद हो जाते हैं छोटे-छोटे स्कूल महीने महीने दो-दो महीने बंद रहते हैं. आवागमन की कोई सुविधा सब नष्ट हो जाती हैं.इसके बाद बाढ़ में हर वर्ष बचाव के लिए सरकार को जो अरबों रुपए अनुदान छती पूर्ति और खाद्य सामग्री का वितरण करना पड़ता है लेकिन उसे छोटे से खाद्य सामग्री में वितरण में यहां के जनता का पेट नहीं भर पता है वह हरदम परेशान रहते हैं ऐसे ही 34 बिंदुओं को उजागर किया गया जो मानवीय वेदना से कर रहे थे जिसको माननीय हाईकोर्ट ने बड़ी गंभीरता और संजीदगी से सुना समझा और संज्ञान में लेकर इस गेपिग तटबंध निर्माण के लिए सम्बंधित विभाग को चार सप्ताह के समय सीमा में बांधते हुए प्रगति रिपोर्ट आहूत की।

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