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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

जल-निकासी के स्थाई समधान न होने के चलते डूबा सैकड़ो बीघा फसल

शोहरतगढ़/सिद्धार्थनगर। मंगलवार को तहसील स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों के हस्ताक्षेप से चर्चित बगुलहवा-डोहरिया के किसानों की जल-निकासी की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया गया है। बीते शनिवार को शोहरतगढ़ ब्लॉक के बगुलहवा व डोहरिया खुर्द के ग्राम प्रधान सद्दाम व प्रधान प्रतिनिधि महेन्द्र चौधरी ने तहसील समाधान दिवस में जल निकासी के संदर्भ में प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप था कि दोनों गाँव के खेतो का पानी डोहरिया खुर्द के आराजी के रास्ते ह्युम पाइप के माध्यम से पूर्व से ही जाता रहा हैं। बाद में उसे गाँव की एक महिला ने मिट्टी डालकर पाट दिया। पूर्व में तहसील प्रसाशन की मदद से उस मिट्टी को हटवाकर जल निकासी बनवाई गयी थी, लेकिन उस जल निकासी मार्ग को पुनः उन्हीं लोगों द्वारा रोक दिया गया हैं, जिससे फसल ख़राब हो रही हैं और सैकड़ो बीघा जमीन जलमग्न हो गया हैं तथा गाँव में भी पानी भर गया हैं। उन्होंने डोहरिया में बंद किए गए पाइप को खुलवाने की मांग की थी। बार-बार अनुरोध एवं शिकायत के बाद भी रविवार को जब समस्या का समाधान होता नहीं दिखा तो बगुलहवा एवं डोहरिया के किसान उग्र हो गए और अपनी फसल को बचाने के लिए अनुबंध के आधार पर छोड़ी गई एक मीटर की जमीन पर जल निकासी का रास्ता खोजने लगे। इसी बीच किसानों ने जल निकासी के लिए रमाकांत की दीवाल में रास्ता बना दिया हालांकि इस अस्थाई विकल्प के लिए रमाकांत का परिवार विरोध करता नजर आ रहा है। दोनों तरफ से की गयी शिकायत का संज्ञान लेकर तहसील प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर जाकर उसका स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि लिखित समझौते के बाद भी गाटा संख्या 291/1.306 हे० की भूमि पर छोड़े गये 1 मीटर के अनुबंध को रमाकांत पुत्र गाँधी नहीं मान रहे हैं, और जबरिया जल निकासी के लिए 1 मीटर छोडी गयी भूमि पर अतिक्रमण कर लिया हैं। मौके पर शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा दिनांक 10-06-2023 को किया गया समझौता पत्र भी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। हालांकि वह समझौता पत्र पहले से प्रशासनिक अधिकारियों के पास भी मौजूद था। मौके पर पहुंची राजस्व टीम ने माना कि गाटा संख्या 291/1.306 हे० भूमि पर खातेदार रमाकांत व सह खातेदार रामशंकर द्वारा आधा-आधा मीटर यानी कुल 1 मीटर भूमि पर निर्माण न करने का अनुबंध किया गया था, जिससे बगुलहवा सिवान का पानी आसानी से जा सके और जलजमाव की समस्या न उत्पन्न हो। जानकार यह भी बताते हैं कि रमाकांत पक्ष द्वारा अतिक्रमण के बाद करीब 70 बीघा धान की फसल प्रभावित हैं और 5 घरों में जलजमाव हैं। जानकारों का यह भी कहना हैं कि मौके पर गयी राजस्व टीम ने यह माना हैं कि आवेदिका के पति रमाकांत पुत्र गाँधी द्वारा समझौते का अवहेलना कर मकान मनाया गया हैं। हालांकि कि रमाकांत द्वारा यह कहा जा रहा हैं कि वह उसकी आराजी संपत्ति हैं और इस मामले में उसके परिजनों द्वारा कई अधिकारियों से पत्राचार किया हैं। मामला कुछ भी हो लेकिन ग्रामीणों का तो यही कहना है कि साहब! यदि जल निकासी की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया तो हम लोग भुखमरी के कगार पर आ जाएंगे। एक ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जलभराव के कारण कुछ लोगों ने तो अपने खेत की रोपाई भी नहीं कर पाई है, और जिन लोगों ने खेत की रोपाई कर दी है उसे खेत में करीब एक सप्ताह से पानी भरा हुआ है। हालांकि इस चर्चित विवाद से पूर्व इस प्रकार की कोई समस्या नहीं होती थी। जल निकासी के लिए छोड़ी गई 1 मीटर की भूमि पर किया गया अतिक्रमण जल निकासी समस्या का सबसे बड़ा कारण है। इस दौरान नायब तहसीलदार महमूद अंसारी, लेखपाल रजनीश विश्वकर्मा, लेखपाल पूजा कश्यप स्थानीय पुलिस आदि मौजूद रहे।

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