सनसनीखेज खुलासा: परदेस में कमा रहा था युवक, साजिश कर फर्जी हस्ताक्षर और मोहर से तैयार किए जाली दस्तावेज

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में जालसाजी और कूटनीति का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायती राज और ग्रामीण राजनीति के काले चेहरे को उजागर कर दिया है। वर्षों से घर से दूर रहकर रोजी-रोटी कमा रहे एक निर्दाेष व्यक्ति को फर्जी दस्तावेजों के जाल में फंसाकर उसका भविष्य दांव पर लगा दिया गया है।
क्या है पूरा सनसनीखेज मामला
ग्राम चौरासी (थाना जोगिया) निवासी शिवशंकर पुत्र सूरजनाथ पिछले 14 वर्षों (सन् 2011) से मध्य प्रदेश के रायपुर में रहकर मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं। इसी बीच, उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने उनके नाम से एक फर्जी नियोजन प्रमाण-पत्र और जाली स्वघोषणा पत्र तैयार कर दिया।पीड़ित शिवशंकर ने पुलिस को दिए शपथ-पत्र में सीधे तौर पर राम सागर यादव (पुत्र पूर्व ग्राम प्रधान) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि शिवशंकर के फर्जी हस्ताक्षर किए गए।ग्राम पंचायत की फर्जी मोहर का इस्तेमाल हुआ। वर्तमान ग्राम प्रधान को गुमराह कर पीड़ित के खिलाफ पुलिस अधीक्षक और थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।रायपुर से भागकर सिद्धार्थनगर पहुँचे शिवशंकर ने नोटरी शपथ-पत्र के जरिए अपनी बेगुनाही के सबूत पेश किए हैं। उन्होंने कहा, जब मैं जिले में था ही नहीं, तो मैंने घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कैसे किए? यह मेरी सामाजिक छवि धूमिल करने और मुझे कानूनी पचड़े में फंसाने की एक गहरी राजनीतिक साजिश है।
सोशल मीडिया पर उठ रही कार्रवाई की मांग
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक आम आदमी के नाम पर इतनी बड़ी जालसाजी करने की हिम्मत इन श्सफेदपोशोंश् में कहाँ से आई?पुलिस प्रशासन से बड़ी उम्मीदेंपीड़ित ने थानाध्यक्ष जोगिया और उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए मांग की है कि जाली दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हो।दोषी राम सागर यादव और उसके सहयोगियों पर धोखाधड़ी पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो। पीड़ित को मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न से न्याय दिलाया जाए।




