शीघ्र ही नेपाल सीमा तक पक्की सड़कों का होगा निर्माण

सिद्धार्थनगर। नेपाल वार्डर तक कच्ची सड़कों से आवाजाही करने वाले ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना का आगाज हो रहा है। अब उन्हें धूल और कीचड़ से भरी पगडण्डियों पर चलने की आवश्यकता नहीं होगी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इन कच्ची सड़कों को पक्का बनाने की योजना बनाई है। पहले चरण में 25 गांवों की कच्ची सड़कों को चिन्हित किया जाएगा, जिनका डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर शासन को भेजा जायेगा। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य प्रारम्भ होगा। प्रशासन ने ऐसे गांवों को प्राथमिकता दी है, जिनकी कच्ची सड़क सीधे नो-मैन्स लैण्ड तक जाती है लेकिन अब तक पक्की सड़क का अभाव है। वर्तमान में कई सीमावर्ती गांवों के लोग वर्षा ऋतु में कीचड़ और गड्ढों से परेशान होकर आवागमन करते हैं। इस पहल से न केवल ग्रामीणों को राहत मिलेगी बल्कि सीमा पर सुरक्षा और आवाजाही भी मजबूत होगी।
दूसरे चरण में शामिल होंगे और गांव
पीडब्ल्यूडी ने बताया कि प्रथम चरण में चिन्हित गांवों का सर्वे कार्य तेजी से चल रहा है। प्रान्तीय और इटवा खण्ड क्षेत्र के गांवों की सड़कों को चिन्हित किया जा रहा है। दूसरे चरण में छूटे हुए गांवों को भी इस योजना से जोड़ा जायेगा।
धनौरा मुस्तकहम से होगी शुरुआत
योजना के तहत प्रयोग के रूप में सबसे पहले शोहरतगढ़ तहसील के धनौरा मुस्तकहम गांव की सड़क को पक्का बनाया जायेगा। यह गांव सीधे नो-मैन्स लैण्ड से जुड़ा है। यहां एसएसबी की 43वीं वाहिनी की बीओपी भी स्थापित है। गांव से करीब 300 मीटर की दूरी पर इण्डो-नेपाल बॉर्डर सड़क गुजरती है, लेकिन गांव तक पक्की सड़क नहीं है। अब इस मार्ग को पक्का कर दिया जायेगा। इससे यह जनपद का छठा पक्का मार्ग होगा जो नेपाल सीमा से जुड़ेगा। इससे पूर्व बढ़नी, कोटिया, खुनुवां, कपिलवस्तु और हरवंशपुर की सीमा तक पक्की सड़क का निर्माण हो चुका है। इस सम्बन्ध में अधिशासी अभियन्ता पीडब्ल्यूडी आशीष भारद्वाज ने बताया कि नेपाल सीमा तक कच्ची सड़कों को पक्का बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। डीपीआर शासन को भेजी जायेगी और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य प्रारम्भ होगा।




