धरातल पर मनुष्य के कर्म ही जीवित रहते हैं रू राधेश्याम शास्त्री

कुशीनगर/बोदरवार। चौरासी लाख योनियों में मुनष्य का जीवन सर्व श्रेष्ठ माना गया है प् इसी लिए तुलसीदास जी ने रामायण में स्पष्ट रूप से वर्णित किया है प् कि ष् बड़े भाग्य मानुष तन पावा ष् मुनष्य का जीवन बहुत ही अच्छे कर्मों के बाद मिला है प् मृत्यु के बाद मोक्ष को प्राप्त कर लेने के पश्चात धरातल पर मनुष्य के कर्म ही जीवित रहते हैं प् ज्ञात हो ? कि 17 फरवरी सोमवार को विकास खंड कप्तानगंज के ग्राम सभा पकड़ी में श्रीमद्भागवत कथा को सुनाते हुए राधेश्याम शास्त्री जी महराज उक्त बातों को कही प् इन्होंने कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए कर्म हमेशा जीवित रहते हैं प् मुनष्य के रुप में अवतरित हुए श्रीकृष्ण द्वारा जिन जिन स्थानों पर लीला किया गया है वह धरती, चंद्रमा,पहाड़, आदि आज भी सनातन के साक्ष्य के रुप में जीवित है प् जिस यमुना जी ने श्रीकृष्ण भगवान को देखा और जाना तथा उनका स्पर्श कर अपने आप को कृतार्थ समझा वह आज भी हमारे बीच मौजूद हैं प् खेल खेलते समय यमुना जी में गेंद चला गया उसको लेने के लिए श्रीकृष्ण भगवान यमुना जी में कूद गए और वहां से कालियानाग पर सवार होकर नृत्य करते हुए गेंद को लेकर वापस यमुना तट पर आ गए प् कालियानाग को भगाना अर्थात अपने कर्म/ कर्तव्य और उसकी सफलता या विफलता से उत्पन्न अहंकार अथवा विषाद को भगाना ही कालियानाग को भगाने की कथा है प् आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रांगण में मुख्य अतिथि के रुप में भाजपा नेता शंभू चौधरी उपस्थित रहे प् इस दौरान प्रधान प्रतिनिधि आनंद सिंह, प्रधान शर्मिला सिंह, सपा नेता कैलाश चंद, आशुतोष सिंह, विजय प्रताप सिंह, छोटेलाल मद्धेशिया,ऊषा सिंह, अनामिका सिंह, सरोजनी सिंह, गीता सिंह, कनकलता सिंह, राजनाथ गिरि, मनीष मद्धेशिया सहित आदि ग्रामीणों संग महिलाएं उपस्थित रहीं प्




