बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचे थाईलैंड के बौद्ध श्रद्धालु, गंध कुटी में की विशेष पूजा-अर्चना
श्बुद्धं शरणं गच्छामिश् के उद्घोष से गूंजा परिसर, ऐतिहासिक स्थलों का भी किया भ्रमण

दैनिक बुद्ध का संदेश
श्रावस्ती। विश्व प्रसिद्ध बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में थाईलैंड से आए बौद्ध श्रद्धालुओं के दल ने गंध कुटी पहुंचकर बौद्ध भिक्षु भवरानंद की अध्यक्षता में पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की। इस दौरान पूरे परिसर में ष्बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामिष् के पवित्र उद्घोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षु भवरानंद ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को कभी भी क्रोध की सजा नहीं मिलती, बल्कि क्रोध ही मनुष्य को सजा देता है। उन्होंने कहा कि हजारों युद्ध जीत लेने के बाद भी वास्तविक विजय तब तक संभव नहीं है, जब तक मनुष्य स्वयं पर विजय प्राप्त न कर ले। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में केवल लक्ष्य प्राप्त करना ही महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि उस लक्ष्य तक पहुंचने की यात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। पूजा-अर्चना के उपरांत थाईलैंड से आए श्रद्धालुओं ने श्रावस्ती के ऐतिहासिक एवं बौद्ध धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने कौशांबी कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, गंध कुटी, राहुल कुटी, संघा बुद्ध विहार, कच्ची कुटी एवं पक्की कुटी सहित अन्य प्रमुख स्थलों का अवलोकन कर उनके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर, नाग लोक, धम्म सागर, गाना लोक, विद्यावती सहित बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे।




