खेसरहा में लाखों का आरआरसी सेंटर बना शोपीसः मरवटिया बाजार में ठोस कचरे का नहीं हुआ वैज्ञानिक निस्तारण

दैनिक बुद्ध का संदेश
खेसरहा। खेसरहा विकासखंड स्थित मरवटिया बाजार ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये की लागत से बना रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) शोपीस बनकर रह गया है। ठोस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के उद्देश्य से निर्मित यह केंद्र आज तक संचालित नहीं हो सका है। केंद्र भवन पर न तो पेंटिंग कराई गई है और न ही इसका नाम और उद्देश्य अंकित है। ग्रामीणों के अनुसार, यह योजना उनके लिए श्हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के औरश् जैसी साबित हो रही है, क्योंकि इसका वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह योजना धरातल पर विफल हो गई है। गांव में आज भी कचरा इधर-उधर फेंका जा रहा है, जबकि उसके निस्तारण के लिए बना आरआरसी सेंटर वीरान पड़ा है। ग्रामीण साहिल, चंद्र प्रकाश, राम प्रसाद और सविता ने बताया कि आरआरसी सेंटर बनने के बाद गांव में सफाई व्यवस्था सुधरने की उम्मीद थी। हालांकि, आज तक यहां कचरा एकत्र करने या उसके वैज्ञानिक निस्तारण की कोई व्यवस्था शुरू नहीं हुई है, जिससे सरकारी धन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। ग्राम प्रधान विमलावती के प्रतिनिधि धर्मेंद्र जायसवाल ने कहा कि केंद्र को पूरी तरह संचालित कराने और आवश्यक व्यवस्थाएं शुरू कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से मांग की जाएगी, ताकि इसका मूल उद्देश्य पूरा हो सके। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई इस स्वच्छता परियोजना का उपयोग न होने से सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।




