जनता के बीच जड़ें जमा रहा विद्यालय पेयरिंग को लेकर सरकार विरोध का मुद्दा

सिद्धार्थनगर। कम बच्चों की तादाद वाले विद्यालयों को बन्द कर उसे दूसरे स्कूलों में विलय कर देने की सरकारी नीति का विरोध अब घीरे-धीरे जमीन पर ज़ड़े जमाने लगा है। पहले इस नये नियम के विरोध में छिटपुट आवाजें ही उठी रही थीं, लेकिन अब यह मुद्दा समाज के हर वर्ग के बीच अपनी जड़ें जमाता दिख रहा है। पेयरिंग की नीति को लेकर जिले में जो विवाद है, उसे जांचने से पहले यह जनना होगा कि जिस गांव के प्राइमरी स्कूल में 50 से कम बच्चे पंजीकृत होंगे, उन्हें बन्दकर बच्चों को पड़ोस के स्कूल में भेज दिया जायेगा। भले ही पड़ोस का स्कूल दो या तीन किमी0 की दूरी पर स्थित हो। सारा विरोध में भी इसी नियम को लेकर है। अभिभावकों का कहना है कि कक्षा एक में पढ़ने वाला बच्चा औसतन चार साल का होता है। ऐसे में अपने गांव का स्कूल बन्द हो तो वह एक दो तीन किमी0 दूर के विद्यालय में कैसे जा पायेगा। ग्रामीण परिवेश में बच्चों को लाने ले जाने तथा बच्चों के वापस लाने की समस्या हो जायेगी। अभिभावक विनीत कुमार कहते हैं क गांव के गरीबों के पास न साधन होते हैं, न ही लंच बाक्स देने के लिए आर्थिक संसाधान होते हैं। ऐसी ही सोच, हर ग्रामीण की है। अभिभावक ही नहीं खुद शिक्षक भी सरकार की इस नीति के विरोध में हैं। मंगलवार को प्रथमिक शिक्षक संघ ने इस सवाल को लेकर स्थानीय बीएसए कार्यालय पर धरना दिया। प्रशिसं अध्यक्ष राधारमण त्रिपाठी का आरोप था कि सरकार धीरे धीरे शिक्षा का निजीकरण करने में लगी है। पेयरिंग व्यवस्था उसी साजिश का अंग है। उन्होंने इस मुद्दे पर संघर्ष की बात भी कही। वहीं पेयरिंग के मुद्दे पर राजनीतिक दल भी सामने आने लगे हैं। सोमवार को जिला कार्यालय समाजवादी पार्टी की बैठक में भी पेयरिंग का मुद्दा जोर शोर से उठाया गया। बैठक में सपा जिलाध्यक्ष लालजी यादव ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार गरीबों के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने के लिए परिषदीय विद्यालयों को पेयरिंग कर रही है। संसाधन बढ़ाने के बजाए सरकार एक-एक करके प्राथमिक विद्यालयों को बन्द करने पर तुली है, जिससे अध्यापकों की भर्ती न करनी पड़े। सरकार के इस मनमाने रवैये के खिलाफ आन्दोलन करेंगी। याद रहे सपा का जनाधार ग्रामीण क्षेत्रों में है। इसलिए इस मुद्दे पर जोर देगी। यही नहीं जिले में ग्राम प्रधानों का एक वर्ग भी इसके खिलाफ देखा जा रहा है। उसका मानना है कि यह गांव बनाम शहर का बंटवारा है। जिसमें गांव वालों को भुगतना पड सकता है। कुल मिलाकर विद्यालय पेयरिंग का मुद्दों में जड़े जमा रहा है। कुछ तो पेयरिंग विरोध को सरकार के विरोध की भी संज्ञा दे रहे हैं।




