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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

आपसी मतभेद के चलते चाकू से किया वार, अफरातफरी में एंबुलेंस ने बचाई मरीज की जान

दैनिक बुद्ध का सन्देश
सिद्धार्थ नगर 22 वर्षीय रवि पुत्र राजेश ग्राम मस्जिदिया ब्लॉक इटवा जिला सिद्धार्थनगर के निवासी है जो अपना घर बनवाने के लिए ठेकेदार को पैसे दे दिए थे लेकिन ठेकेदार ने लेबर को पैसे नहीं दिए जिससे गुस्से में आकर लेबर ने चाकू से गले पेट और बांह पर कई हमले किये जिससे शरीर से काफी खून बहने की वजह से उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। हालत बिगड़ते देख परिवार के लोगों ने 108 पर सूचना दी, इमर्जेसी की सूचना सीएचसी इटवा की गाड़ी न्च्32 थ्ळ 12319 को मिली। ईएमटी दिनेश और पायलट श्यामलाल बताए गये स्थान पर पहुंचे , घटना स्थल पर ईएमटी ने बड़ी फुर्ती से मरीज को स्ट्रेचर की सहायता से एंबुलेंस में लिया और गहरे जख्म बड़ी पट्टीयो के सहायता से बहते खून को रोका। मरीज को तत्काल सीएचसी इटवा से जिला अस्पताल सिद्धार्थ नगर के लिए रवाना हुवे, रास्ते में ऑनलाइन डॉक्टर रोचना की सुपरविजन में अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सक मरीज की देखभाल में जुट गए। मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए घरवालों ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा की मदद ली। ईएमटी की तत्परता, तकनीकी दक्षता और बेहतर पेशेंट केयर के चलते मरीज को सुरक्षित जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू करते हुए उसे खतरे से बाहर बताया। क्लस्टर प्रशिक्षण का दिखा सकारात्मक परिणामः हाल ही में संचालित क्लस्टर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ इस घटना में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। प्रशिक्षण के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज की स्थिति का आकलन, त्वरित निर्णय क्षमता, विषाक्तता (च्वपेवदपदह) के मामलों का प्रबंधन एवं अस्पताल पहुंचने तक जीवन रक्षक देखभाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष जोर दिया गया था। ईएमटी जय सिंह यादव द्वारा प्रदर्शित दक्षता और पेशेवर कार्यशैली इस प्रशिक्षण की सफलता को दर्शाती है।परिजनों और अस्पताल स्टाफ ने की सराहनाःमरीज के परिजनों और अस्पताल कर्मियों ने 108 एंबुलेंस सेवा तथा ईएमटी दिनेश की सराहना करते हुए कहा कि यदि समय पर एंबुलेंस और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी नहीं मिलते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। यह घटना न केवल 108 एंबुलेंस सेवा की उपयोगिता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि प्रशिक्षित ईएमटी और समय पर मिली आपातकालीन चिकित्सा सहायता किसी भी मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकती है

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