धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने लिया था अवतार

डुमरियागंज। भनवापुर क्षेत्र के सेमरा बनकसिया में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार की रात कथा वाचक पं. राकेश शास्त्री ने बताया कि अधर्म का विनाश कर धर्म की स्थापना के लिए श्रीकृष्ण ने अवतार लिया था। वही निकली बाल कृष्ण की अनुपम झांकी देख श्रोता भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने श्री कृष्ण जन्म की कथा में आगे बताया कि वसुदेव जी श्रीकृष्ण के इच्छा के अनुसार उन्हें मथुरा से गोकुल में नंद और यशोदा के घर छोड़कर उनकी कन्या को ले जाकर कंस को आठवी संतान कह सौंप दिया। वसुदेवजी ने कहा इसे छोड़ दीजिये मगर कंस ने नही माना और कन्या को पत्थर पर पटकने के लिए ऊपर उठाता है। तुरंत कन्या कंस के हाथ से छूट गयी और आकाश में देवी का रूप धारण कर कंस को चेतावनी देकर कहा कि तुम्हें मारने वाला गोकुल में जन्म ले चुका है। कह वह अंतर्ध्यान हो गई। इतनी बात सुन कंस ने गोकुल में सभी नवजातबच्चों को मारने का आदेश देता है।श्रीकृष्ण को मारने के लिए तरह तरह के उपाय करने लगा मगर सभी असफल हुए।तब कंस ने पूतना नामक राक्षसी को भेजा कृष्ण को मारने के लिए अपने स्तनों में विष लगा कर स्तन पान कराने लगी भगवान कृष्ण ने माया समझकर पूतना का स्तन पान करते करते उसके प्राणों का भी पान कर पूतना का प्राणांन्त कर लिया। इस मौके पर यजमान सीताराम मिश्र, राजन शास्त्री, ध्रुवराज, गोलू, सरिता, सुमन, अभिषेक, कुसुम, आदर्श, किरन, रंजीत, प्रतिमा, रागिनी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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