ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका विश्व में किसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है?

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हेलसिंकी। जून में दुनियाभर के कूटनीतिक विशेषज्ञों की नजरें सिंगापुर की ओर लगी हुई थीं। 12 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन से ऐतिहासिक बैठक कर रहे थे। एक माह बाद अब फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी का नंबर है जहां सोमवार यानि आज ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने वाले हैं। लेकिन इस मुलाकात से पहले उन्होंने रूस, योरपीय यूनियन (ईयू) और चीन को दुश्मन करार दे दिया है।

सीबीएस के रविवार को प्रसारित ‘फेस ऑफ द नेशन’ में कार्यक्रम में साक्षात्कार के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका विश्व में किसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है? इस पर ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारे कई दुश्मन हैं। मुझे लगता है कि यूरोपीय संघ एक दुश्मन है, वे सिर्फ हमारे साथ व्यापार करते हैं। अब आप यूरोपीय संघ के बारे में नहीं सोचेंगे, लेकिन वे दुश्मन हैं। कुछ मायनों में रूस दुश्मन है। आर्थिक मामलों में चीन दुश्मन है। निश्चित रूप से वे दुश्मन हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे बुरे हैं। इसका और कोई मतलब नहीं है। इसका मतलब है कि वे प्रतिस्पर्धी हैं।’ अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद अब हर कोई जानना चाह रहा है कि दोनों नेताओं में क्या बातचीत होती है? हालांकि, रविवार को ही ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बैठक से कोई बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है। यूरोप आने से पहले जब ट्रंप ने कहा था कि उनकी यात्रा का सबसे आसान हिस्सा हेलसिंकी प्रवास रहेगा, तो कई लोगों की भृकुटियां तन गई थीं। ब्रुसेल्स और लंदन प्रवास के दौरान अब तक ट्रंप की यात्रा विवादों में रही है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल का मामला फिर गरमा गया है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने में पुतिन ने ट्रंप की गुप्त रूप से मदद की थी। इस मामले में अमेरिका में रूस के 12 खुफिया अधिकारियों के खिलाफ इसी शुक्रवार को आरोप तय किए गए। ट्रंप ने कहा है कि वह पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दखल के लिए आरोपित जासूस सौंपने की मांग कर सकते हैं। दूसरी तरफ, रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वाशिंगटन और मॉस्को के द्विपक्षीय संबंध बेहद खराब हैं। हमें एक नई शुरुआत करनी होगी। हालांकि, हम ट्रंप को बातचीत के योग्य साझीदार मानते हैं।
महाशक्तियों के बीच मसले शीतयुद्ध के बाद अमेरिका
रूस के रिश्ते अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। बिगड़ते रिश्तों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप और उनके समकक्ष व्लादीमीर पुतिन की हेलसिंकी में मुलाकात का एजेंडा पर सबकी नजर है। दोनों महाशक्तियों के बीच प्रमुख मसले इस प्रकार हैं।
नई स्टार्ट संधि: परमाणु हथियारों में कमी लाने के लिए अमेरिका-रूस के बीच स्ट्रेटजिक आ‌र्म्स रिडक्शन ट्रीटी हुई थी। मौजूदा संधि 2021 में खत्म हो रही है। संधि को पांच साल बढ़ाने का प्रावधान है। पुतिन संधि को बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन ट्रंप इसके पक्ष में नहीं हैं।
राजनयिक विवाद: अमेरिका द्वारा अपने यहां चुनाव में दखल देने के मामले पर रूसी राजनयिकों को निकालना और ब्रिटेन में एक पूर्व रूसी एजेंट को जहर देने का मुद्दा जोरों से उठ सकता है। सीरिया विवाद: सीरिया में रासायनिक हमलों को लेकर अमेरिका-रूस आमने-सामने हैं। इस हमले के पीछे राष्ट्रपति ट्रंप ने वहां की असद सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं रूस सीरिया के साथ खड़ा है।
यूक्रेन विवाद: रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले का अमेरिका अंतराष्ट्रीय मंच पर विरोध कर चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि जब तक रूस यूक्रेन की सीमा से अपनी सेना नहीं हटाता है। तब तक दोनों देशों के बीच रिश्ते सौहा‌र्द्रपूर्ण नहीं हो सकते हैं। कड़े आर्थिक प्रतिबंध पिछले साल अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप, सीरिया की असद सरकार को मदद और क्रीमिया पर कब्जा कर लेने के बाद अमेरिका ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं।

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