बीडीए ने 10 महीने पहले अवैध बारातघरों के खिलाफ अभियान चलाकर संचालकों ने कंपाउंडिंग कराने को कहा- दैनिक बुद्ध का संदेश संवाददाता आशीष शर्मा की एक रिपोर्ट

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आशीष शर्मा की एक रिपोर्ट

बरेली। बीडीए ने 10 महीने पहले अवैध बारातघरों के खिलाफ अभियान चलाकर संचालकों ने कंपाउंडिंग कराने को कहा बरेली अभियान थमने के बाद प्राधिकरण के अफसरों ने अवैध बारातघरों की फाइलों की सुध नहीं ली है। मानो फाइल को अलमाारियों में कैद कर दिया गया हो। इधर, बारातघरों में मनमाने तरीके से कार्यक्रमों की बुकिंग चल रही है।

शहर में पॉश इलाकों से लेकर गली-मोहल्लों में ढाई सौ बारातघर चल रहे हैं। शासन के निर्देश पर मार्च 2018 को प्राधिकरण ने 83 अवैध बारातघरों को सूचीगत करके नोटिस जारी किए थे। नोटिस के बाद आधा दर्जन से अधिक बारातघरों पर सीलिंग की कार्रवाई भी की गई थी। बारातघर संचालकों की पैरवी के लिए नेताओं ने अफसरों के साथ बैठक करके कंपाउंडिंग कराने का फैसला लिया था। 17 बारातघर संचालकों ने ही कंपाउंडिंग शुल्क जमा किया था। बीडीए वीसी द्वारा बारातघर संचालकों से दस्तावेज की जांच कराकर ले आउट स्वीकृत कराने के लिए कहा था। दस महीने बीतने के बाद अभी तक न तो प्राधिकरण के अफसरों ने कार्रवाई के लिए कोई सुध ली है और न ही बारातघर संचालकों ने कंपाउउिंग कराना ही उचित समझा है। जिस कारण प्राधिकरण कोराजस्व का घाटा लग रहा है। बीडीए सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि बारातघर संचालकों के दस्तावेजों की जांच की गई थी। इसके बाद फिर से अभियान चलाकर पड़ताल की जाएगी।

 दस महीने बाद भी कार्रवाई की सुध नहीं 

प्राधिकरण के अफसरों ने दस महीने गुजरने के बाद भी किसी बारातघर संचालक को नोटिस तक जारी नहीं किया है। उल्टा उनको कार्रवाई से बचने के रास्ता बताए जा रहे हैं। बारातघर पर मुसाफिरखाने का बोर्ड लगवाकर टैक्स बचाने का तरीका भी समझा दिया गया।  यही वजह है कि सहालग के दिनों में भी बारातघर संचालकों ने दस्तावेज पूरे नहीं किए हैं।

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